1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 10:19:54 AM IST
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Supaul police : सुपौल जिले के कुनौली थाना क्षेत्र से एक ऐसा वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच हड़कंप मचा दिया है। वायरल वीडियो में थाना प्रभारी रोशन कुमार को वर्दी में बैठा दिखाया गया है, जबकि उनके कथित निजी ड्राइवर राजेश कुमार पुलिस वैन चला रहा है और वीडियो बना रहा है। वीडियो में थानाध्यक्ष और ड्राइवर का रवैया न केवल विवादित है, बल्कि सरकारी वाहन के दुरुपयोग और कानून को ठेंगा दिखाने वाले संवादों के कारण पुलिस की छवि पर गंभीर असर डाल रहा है।
वीडियो में सुर्खियों का मुख्य कारण थानाध्यक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए संवाद और बैकग्राउंड म्यूजिक हैं। रील में थानाध्यक्ष मोबाइल पर बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं और ड्राइवर गाड़ी चलाते हुए वीडियो बना रहा है। बैकग्राउंड में “तू तारीख लड़ते रह जेबी, हम जज के खरीद लेबो”, “कोई बाहुबली को झेल लिया जाएगा” और “हई जिला के बाहुबली, चला देब गोली त केहू ना बोली…” जैसे संवाद सुनाई दे रहे हैं। इस तरह के संवाद और अंदाज आम जनता में आक्रोश पैदा कर रहे हैं और यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक संवेदनशील सीमा क्षेत्र में पुलिसकर्मी इस तरह का व्यवहार कर सकते हैं।
वायरल वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि थानाध्यक्ष ने एक निजी व्यक्ति को अवैध रूप से ड्राइवर के रूप में रखा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह व्यक्ति न तो पुलिसकर्मी है और न ही किसी आधिकारिक रूप से अधिकृत है। बावजूद इसके वह सरकारी वाहन चला रहा है और थाना की गतिविधियों में भाग लेता नजर आया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में दोनों को नेपाल की सीमा के पास भी देखा गया है, जिससे सीमा पार आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह लापरवाही अति संवेदनशील सीमा क्षेत्र में गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। उन्होंने इसे न केवल कानून का अपमान बताया है, बल्कि स्थानीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चिंताजनक माना है। कुछ वीडियो में कथित तौर पर रुपये की गड्डियों का दृश्य भी दिखाई दे रहा है, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है।
इससे पहले भी थानाध्यक्ष रोशन कुमार पर मूक-बधिर युवक को नेपाल सीमा के पास छोड़ने के आरोप लग चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन की छवि पर यह गंभीर प्रभाव डाल रहा है। आम लोग सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरों को लेकर गुस्सा जता रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।
सुपौल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शरथ आरएस ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि मामला उनकी जानकारी में आया है और इसकी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और पुलिस की साख को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर पुलिस प्रशासन से तत्काल जवाब देने की मांग की है। कई लोगों ने इसे पुलिस की छवि और नियमों की अनदेखी बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी की है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह घटना संकेत देती है कि कुछ अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत स्वार्थ और रौब दिखाने के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
वायरल वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से यह मामला न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिसमें पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश और चेतावनी देने वाले संदेश शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए पुलिस विभाग को सख्त नियम और प्रशिक्षण की आवश्यकता है, ताकि आम जनता में विश्वास बनाए रखा जा सके।
सुपौल थाना क्षेत्र में वायरल हुए इस वीडियो ने पुलिस की जिम्मेदारी और नैतिकता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। थानाध्यक्ष और उनके कथित निजी ड्राइवर की गतिविधियों पर अब प्रशासनिक और न्यायिक कार्रवाई की निगाह है। आगामी दिनों में जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पुलिस विभाग इस मामले में किस हद तक कार्रवाई करता है और ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।