1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 10:01:09 AM IST
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Bihar Land Records : बिहार सरकार ने कैथी लिपि में लिखे पुराने भूमि अभिलेखों और दस्तावेजों के अनुवाद को लेकर आम नागरिकों को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पुराने दस्तावेजों का अनुवाद वर्षों से आम नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार ने प्रशिक्षित कैथी लिपि परामर्शदाताओं की एक सूची तैयार की है, ताकि अब किसी भी नागरिक को इन दस्तावेजों के अनुवाद में कठिनाई न हो।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी समाहर्ताओं को पत्र जारी करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिलों में कैथी लिपि के दस्तावेजों का अनुवाद करने वाले विशेषज्ञों की कमी है। इसके कारण आम जनता को पुराने भूमि अभिलेखों और दस्तावेजों के उपयोग में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने दक्षता परीक्षण के बाद 29 प्रशिक्षित कैथी लिपि परामर्शदाताओं की सूची तैयार की है। इन परामर्शदाताओं को पाँच दिवसीय विशेष आवासीय प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें उन्हें पुराने दस्तावेजों का सटीक और तेज अनुवाद करने की क्षमता प्रदान की गई। इन परामर्शदाताओं की सेवाएं न केवल विभागीय कार्यों के लिए बल्कि सभी जिलों में आम नागरिकों के लिए भी उपलब्ध होंगी।
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य के नागरिक स्वेच्छा से इन परामर्शदाताओं की सेवाएं ले सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक पृष्ठ के अनुवाद के लिए 220 रुपये की दर निर्धारित की गई है, जो भारत सरकार की संस्थाओं में प्रचलित दर के अनुरूप है। भुगतान ऑनलाइन माध्यम से सीधे परामर्शदाता को किया जाएगा और नगद भुगतान की अनुमति नहीं होगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का उद्देश्य यह है कि भूमि से जुड़े मामलों में आम नागरिक को समयबद्ध, सुलभ और निष्पक्ष सेवा मिले। प्रशिक्षित कैथी लिपि परामर्शदाताओं की उपलब्धता से पुराने दस्तावेजों के अनुवाद में आसानी होगी और आम जनता का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा। विभाग ने सभी समाहर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे आवश्यकता अनुसार इन प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की सेवाएं लें, ताकि नागरिकों को भूमि संबंधी मामलों में सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों की सूची तैयार होने के बाद अब नागरिकों को कैथी लिपि के पुराने अभिलेखों के अनुवाद के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाएगी, बल्कि भूमि विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों में आम जनता की समस्याओं का समाधान भी त्वरित और निष्पक्ष रूप से किया जा सकेगा।
इस पहल से बिहार में भूमि सुधार कार्यों में पारदर्शिता और सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी। विभाग का यह कदम राज्य सरकार की जनता-केंद्रित नीतियों का हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को अपने अधिकारों और दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं का समाधान सुगमता से मिल सके।