Bihar land reform : बिहार सरकार ने भूमि सुधार उप समाहर्ता का पदनाम बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी किया, प्रशासनिक कार्यों में होगा नया स्वरूप

बिहार सरकार ने भूमि सुधार उप समाहर्ता का नाम बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी किया। अधिकारी अब भू राजस्व वसूली, भूमि विवाद निपटारा, ई-मापी और डिजिटलीकरण कार्य करेंगे।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 09:03:48 AM IST

Bihar land reform : बिहार सरकार ने भूमि सुधार उप समाहर्ता का पदनाम बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी किया, प्रशासनिक कार्यों में होगा नया स्वरूप

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Bihar land reform : बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रशासनिक सुधार और भूमि प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं समकक्ष पदों का नाम बदलकर अनुमंडल राजस्व अधिकारी एवं समकक्ष कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य भूमि से जुड़े मामलों के निपटान और भू राजस्व वसूली में तेजी लाना, प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और आम जनता को बेहतर सेवाएँ प्रदान करना है।


पूर्व में भूमि सुधार उप समाहर्ता के पद पर कार्यरत अधिकारी मुख्य रूप से भूमि सुधार योजनाओं और भूमि विवादों के निपटारे तक सीमित कार्यों के लिए जिम्मेदार होते थे। नए पदनाम के तहत अनुमंडल राजस्व अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारियाँ व्यापक और विविध हो गई हैं। इस पद के अधिकारी अब केवल भूमि सुधार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भू राजस्व वसूली, भूमि विवाद निपटारा, दाखिल-खारिज, भू सर्वेक्षण पर्यवेक्षण, लोक भूमि संरक्षण, ई-मानचित्रण (ई-मापी), भू अभिलेख डिजिटलीकरण तथा लोक सेवाओं के अधिकारों से जुड़े कई कार्य करेंगे।


विशेष रूप से, भू राजस्व वसूली और भूमि विवाद निपटारा अधिकारी के मुख्य कर्तव्यों में शामिल होंगे। यह कदम भूमि से जुड़ी पारंपरिक समस्याओं को कम करने और विवाद समाधान की प्रक्रिया को शीघ्र एवं न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही, भूमि से जुड़े मामलों में नागरिकों को होने वाली असुविधा में कमी आएगी और जमीन के उपयोग तथा अधिकारों के मामले अधिक पारदर्शी होंगे।


इसके अलावा, अनुमंडल राजस्व अधिकारी दाखिल-खारिज और भू सर्वेक्षण पर्यवेक्षण का कार्य भी करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अभिलेख सही और अद्यतन हों तथा भूमि से जुड़े दस्तावेजों में किसी प्रकार की अनियमितता न रहे। इस प्रक्रिया के माध्यम से विभाग को भूमि रिकॉर्ड को डिजिटलीकृत करने और भूमि से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।


लोक भूमि संरक्षण के क्षेत्र में भी अनुमंडल राजस्व अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्थानीय जमीनों, सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा तथा उनके अवैध कब्जे को रोकने के लिए अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इससे भूमि से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितता को कम करने में मदद मिलेगी।


तकनीकी दृष्टिकोण से, ई-मापी और भू अभिलेख डिजिटलीकरण को लागू करना विभाग का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। अनुमंडल राजस्व अधिकारी इस कार्य के लिए न केवल स्थानीय भूमि सर्वेक्षण का पर्यवेक्षण करेंगे, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड की गुणवत्ता और अद्यतनता की भी निगरानी करेंगे। इससे भविष्य में भूमि से जुड़े विवादों का निवारण तेजी से किया जा सकेगा और नागरिकों को ऑनलाइन भू अभिलेख और सेवाओं का लाभ मिलेगा।


इस नए पदनाम और कार्यक्षेत्र का मुख्य उद्देश्य भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन को आधुनिक तकनीकी और प्रक्रियागत मानकों के अनुरूप बनाना है। विभाग का कहना है कि यह बदलाव न केवल भूमि से जुड़े मामलों को शीघ्र और पारदर्शी बनाएगा, बल्कि जनता को बेहतर सेवाएँ और सुविधा भी प्रदान करेगा।


बिहार सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय राज्य में भूमि प्रशासन के ढांचे को मजबूत करने और भूमि से जुड़े सभी मामलों में जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इससे अनुमंडल स्तर पर प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी और भूमि से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा।


इस प्रकार, भूमि सुधार उप समाहर्ता से अनुमंडल राजस्व अधिकारी के रूप में पदनाम और कार्यक्षेत्र का विस्तार राज्य के भूमि प्रशासन में नई दिशा और ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है। आम जनता और भूमि मालिकों के लिए यह बदलाव अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा सुनिश्चित करेगा।