Bihar News: पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड में सियार के हमले के बाद दो ग्रामीणों की मौत से इलाके में दहशत का माहौल है. पदुमकेर पंचायत के नारायणपुर गांव निवासी 62 वर्षीय दीनानाथ राउत और जिहुली गांव निवासी गनी साह की सियार के काटने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई. दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी है.
पहली घटना नारायणपुर गांव की है, जहां कुछ दिन पहले सियार ने 62 वर्षीय दीनानाथ राउत को काट लिया था. हमले के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई. परिजनों ने इलाज कराने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. सोमवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. दीनानाथ राउत अपने पीछे पत्नी और चार पुत्रों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं.
वहीं दूसरी घटना पताही के जिहुली गांव की है. यहां गनी साह की मंगलवार सुबह मौत हो गई. परिजनों के अनुसार, 10 जुलाई को एक सियार उनके घर में घुस आया था और उसने गनी साह की गर्दन पर हमला कर दिया था. इसके बाद से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन उनकी हालत लगातार खराब होती गई और मंगलवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया.
एक दर्जन से अधिक लोगों पर हमला
ग्रामीणों के अनुसार, 10 जुलाई को जिहुली गांव में सियार ने काफी आतंक मचाया था. उस दौरान सियार ने एक दर्जन से अधिक लोगों को काटकर घायल कर दिया था. अचानक हुए हमलों के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी. लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे थे.
घायलों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वहां एंटी-रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था. इसके बाद कई घायलों को इलाज के लिए शिवहर और ढाका के अस्पतालों में जाना पड़ा. ग्रामीणों का कहना है कि समय पर जरूरी उपचार नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ गई.
गांवों में बढ़ी दहशत
लगातार हो रहे सियार के हमलों से पताही प्रखंड के कई गांवों में डर का माहौल बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं. बच्चों और महिलाओं को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया गया है. खेत और बगीचे में काम करने वाले लोग भी सियार के हमले की आशंका के कारण सतर्क हैं.
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हमलों और शिकायतों के बावजूद सियार को पकड़ने के लिए अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. लोगों का कहना है कि पहले भी वन विभाग और प्रशासन से विशेष अभियान चलाकर सियार को पकड़ने की मांग की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने के कारण अब दो ग्रामीणों की जान चली गई.
एंटी-रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता पर भी सवाल
सियार के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर समय पर इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण घायलों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ा. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित इलाकों के अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित गांवों में तत्काल विशेष अभियान चलाकर सियार को पकड़ने की मांग की है. लोगों का कहना है कि गांवों में लगातार सियार के हमले हो रहे हैं और इस वजह से ग्रामीणों में भय बना हुआ है. प्रशासन से लोगों की सुरक्षा के लिए जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की गई है.
मुखिया विकास कुमार ने बताया कि उनके पंचायत के गनी साह की सियार के काटने से मौत हुई है. उन्होंने बताया कि घटना के बाद ग्रामीणों में काफी डर है और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है.
मामले को लेकर पकड़ीदयाल की एसडीएम मंगला कुमारी ने बताया कि सियार के काटने से दो लोगों की मौत की सूचना मिली है. मामले की जांच कराई जा रही है. प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. वन विभाग को सतर्क रहने और सियार को पकड़ने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी.





