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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में गूंजा भूमिहार ब्राह्मण का मुद्दा, मंत्री विजय सिन्हा ने दिया बड़ा बयान; पढ़िए क्या कहा

बिहार विधानसभा में भूमिहार ब्राह्मण का मुद्दा उठा। मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि राजस्व विभाग के अभिलेख में नाम पहले की तरह ही दर्ज रहेगा।

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में गूंजा भूमिहार ब्राह्मण का मुद्दा, मंत्री विजय सिन्हा ने दिया बड़ा बयान; पढ़िए क्या कहा
Tejpratap
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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा के शून्य काल के दौरान भूमिहार ब्राह्मण समुदाय से जुड़ा मुद्दा जोर-शोर से उठा। अतरी के विधायक रोमित कुमार ने सदन में यह सवाल उठाया कि वर्ष 1931 की जनगणना में भूमिहार ब्राह्मण की आबादी लगभग 9 लाख दर्ज की गई थी, लेकिन वर्ष 2013 में कराई गई जातीय आधारित गणना की 215 जातियों की सूची में इस समुदाय का नाम शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सूची से नाम गायब होना समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।


इस पर जवाब देते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से मंत्री विजय सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि विभागीय अभिलेखों में पहले की तरह “भूमिहार ब्राह्मण” ही दर्ज रहेगा। उन्होंने कहा कि राजस्व भूमि सुधार विभाग के रिकॉर्ड में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही इसमें किसी तरह का सुधार प्रस्तावित है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि विभागीय दस्तावेजों में दर्ज पारंपरिक प्रविष्टि यथावत बनी रहेगी।


विधायक रोमित कुमार ने सदन में कहा कि 2013 की जातीय गणना में 215 जातियों की सूची प्रकाशित की गई थी, लेकिन उसमें भूमिहार ब्राह्मण का नाम नहीं था। उनका तर्क था कि जब ऐतिहासिक जनगणना में इस समुदाय की स्पष्ट गणना हुई थी, तो नई सूची में इसका उल्लेख न होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट स्थिति बताने और समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की।


मंत्री विजय सिन्हा ने अपने जवाब में कहा कि राजस्व विभाग के अभिलेख अलग प्रक्रिया और आधार पर संचालित होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग का उद्देश्य किसी भी समुदाय की पहचान में परिवर्तन करना नहीं है, बल्कि रिकॉर्ड को यथास्थिति बनाए रखना है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि विभागीय दस्तावेजों में “भूमिहार ब्राह्मण” नाम पूर्ववत रहेगा और इससे संबंधित किसी तरह की भ्रांति की आवश्यकता नहीं है।


सदन में इस विषय पर कुछ समय तक चर्चा हुई और अन्य सदस्यों ने भी अपनी राय रखी। हालांकि मंत्री के आश्वासन के बाद मामला शांत हो गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जातीय गणना और अभिलेखों में दर्ज नामों को लेकर समय-समय पर ऐसे सवाल उठते रहे हैं, लेकिन सरकार ने इस बार स्पष्ट कर दिया है कि राजस्व रिकॉर्ड में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।