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Vande Bharat Sleeper Express : देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का परिचालन का डेट तय, बिहार होकर गुजरेगी लेकिन ठहराव नहीं

"देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस 22 जनवरी से हावड़ा-कामाख्या रूट पर नियमित चलेगी, लेकिन बिहार के सीमांचल में किशनगंज और बारसोई पर स्टॉपेज न होने से लोग निराश हैं।"

Vande Bharat Sleeper Express : देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का परिचालन का डेट तय, बिहार होकर गुजरेगी लेकिन ठहराव नहीं
Tejpratap
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Vande Bharat Sleeper Express : देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन का नियमित परिचालन 22 जनवरी से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेन संख्या 27575/76 पश्चिम बंगाल के हावड़ा और असम के कामाख्या के बीच चलेगी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अत्याधुनिक स्लीपर ट्रेन का उद्घाटन किया था। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भारतीय रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो लंबी दूरी के यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव देने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।


हालांकि, इस ट्रेन को लेकर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मायूसी का माहौल है। वजह यह है कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस बिहार से होकर जरूर गुजरेगी, लेकिन राज्य के किसी भी स्टेशन पर इसका ठहराव नहीं दिया गया है। यह ट्रेन बिहार में किशनगंज और बारसोई जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों से होकर निकलेगी, लेकिन इन दोनों जगहों पर इसका स्टॉपेज नहीं होगा। इससे सीमांचल क्षेत्र के लोगों में निराशा देखी जा रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमांचल पहले से ही विकास की मुख्यधारा से काफी हद तक पीछे है। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर जैसी प्रीमियम ट्रेन का बिना ठहराव गुजर जाना क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है। यात्रियों को इस ट्रेन में सफर करने के लिए पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी, मालदा टाउन या अन्य स्टेशनों तक जाना पड़ेगा, जो सीमांचल के लोगों के लिए अतिरिक्त समय और खर्च बढ़ाएगा।


रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन चलेगी। कामाख्या से इसका नियमित परिचालन 22 जनवरी से शुरू होगा। यह ट्रेन शाम 6.15 बजे कामाख्या से रवाना होगी और रंगिया, बोंगाईगांव, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, न्यू जलपाईगुड़ी, आलुआबाड़ी, मालदा टाउन, न्यू फरक्का, आजिमगंज, कटवा, नबद्वीप और बडेल होते हुए अगले दिन सुबह 8.15 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वहीं, हावड़ा से इस ट्रेन का नियमित परिचालन 23 जनवरी से शुरू होगा।


कामाख्या और हावड़ा के बीच की दूरी लगभग 971 किलोमीटर है, जिसे वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस महज 14 घंटे में तय करेगी। इस ट्रेन की औसत रफ्तार 69.35 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि इसकी अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। यह समय-सीमा पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में काफी कम है, जिससे यात्रियों को लंबी दूरी का सफर कम समय में पूरा करने में मदद मिलेगी।


वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें पूरी तरह वातानुकूलित स्लीपर कोच, आरामदायक बर्थ, बेहतर सस्पेंशन सिस्टम, आधुनिक शौचालय और उन्नत सुरक्षा व्यवस्था दी गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस ट्रेन के नियमित संचालन से व्यावसायिक यात्रियों, पर्यटकों और आम यात्रियों को बड़ी सहूलियत मिलेगी। खासकर उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत के बीच यात्रा करने वालों के लिए यह ट्रेन एक बेहतर विकल्प साबित होगी।


रेलवे का दावा है कि वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस के चलने से क्षेत्रीय रेल संपर्क और मजबूत होगा। उत्तर-पूर्व भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, सीमांचल में ठहराव नहीं दिए जाने को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन रेलवे से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किशनगंज या बारसोई में ट्रेन का स्टॉपेज दिया जाए, तो सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है।


फिलहाल, देश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस अपने नियमित सफर के लिए तैयार है। यह ट्रेन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की नई पहचान बनकर सामने आ रही है, लेकिन बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए यह अवसर अभी भी अधूरा सा नजर आ रहा है।

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