1st Bihar Published by: First Bihar Updated Tue, 20 Jan 2026 12:39:47 PM IST
- फ़ोटो
Bihar crime : बिहार पुलिस अपराध जांच को वैज्ञानिक, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में छह नए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) स्थापित किए जाने की तैयारी है। इससे साल के अंत तक बिहार में कुल एक दर्जन के करीब फॉरेंसिक जांच केंद्र कार्यरत हो जाएंगे। इस पहल से अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं रहेगा और न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा बढ़ेगा।
सीआईडी के एडीजी पारसनाथ ने पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में नए एफएसएल स्थापित किए जाएंगे। फिलहाल राज्य में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में चार एफएसएल कार्यरत हैं। इसके अलावा दरभंगा और रोहतास में मार्च तक एफएसएल कार्यालय शुरू होने की संभावना है।
साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए इस साल मार्च तक पटना और राजगीर में स्थित एफएसएल में साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू कर दी जाएगी। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड और अन्य तकनीकी अपराधों में अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी तेज होगी।
एडीजी ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत अधिकांश मामलों में एफएसएल रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। खासकर सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य जरूरी हैं। इससे फॉरेंसिक रिपोर्ट की भूमिका और मजबूत हो गई है और अपराधियों को सजा दिलाने में यह निर्णायक साबित हो रही है।
आंकड़ों के अनुसार 2024 में 1 जुलाई से 31 दिसंबर के बीच 5,141 कांडों के 25,285 प्रदर्शों की फॉरेंसिक जांच पूरी की गई। वहीं 2025 में अब तक 10,995 कांडों के 56,511 प्रदर्शों की जांच कर रिपोर्ट संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराई जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि बिहार में फॉरेंसिक जांच की क्षमता लगातार बढ़ रही है।
डीएनए जांच को और मजबूत करने के लिए मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर के लिए एक-एक डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। इसके साथ ही पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के लिए भी अतिरिक्त डीएनए जांच सुविधा विकसित की जा रही है। उपकरणों के आधुनिकीकरण के लिए लगभग 162.93 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
मानव संसाधन को मजबूत करने के लिए राज्य की एफएसएल में 44 राजपत्रित पदाधिकारी और 85 वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक कार्यरत हैं। इसके अलावा 89 सहायक निदेशक और 100 वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। चयनित अभ्यर्थियों का प्रमाण-पत्र सत्यापन और मेडिकल जांच चल रही है।
पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में सीआईडी को आवंटित कॉलोनी में एक अत्याधुनिक फॉरेंसिक परिसर के निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा गया है। साथ ही राज्य के सभी 38 जिलों के लिए चलंत फॉरेंसिक इकाइयों को स्वीकृति दी गई है। फिलहाल 51 चलंत फॉरेंसिक वाहन उपलब्ध हैं और 50 अतिरिक्त वाहनों की खरीद के लिए 212 करोड़ रुपये का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है।
बिहार पुलिस का यह हाईटेक अभियान अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और सजा की प्रक्रिया को और तेज करेगा। वैज्ञानिक साक्ष्यों के मजबूत होने से न सिर्फ जांच की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी और मजबूत होगा।