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Bihar News : आरोपी को लेकर अस्पताल पहुंची पुलिस, लौटते समय बंद हो गई गाड़ी; धक्का लगाते-लगाते पसीने से तर हुए जवान

बाढ़ सदर अस्पताल में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आरोपी को मेडिकल जांच के लिए लेकर पहुंची एनटीपीसी थाना पुलिस की गाड़ी अचानक खराब हो गई। काफी देर तक जवान धक्का लगाते रहे, लेकिन वाहन स्टार्ट नहीं हुआ। इससे पुलिस संसाधनों पर सवाल उठने लगे।

Bihar News : आरोपी को लेकर अस्पताल पहुंची पुलिस, लौटते समय बंद हो गई गाड़ी; धक्का लगाते-लगाते पसीने से तर हुए जवान
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar News : बाढ़ अनुमंडल के एनटीपीसी थाना की पुलिस को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब एक आरोपी को मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल लाने के दौरान उनका सरकारी वाहन अस्पताल परिसर में ही खराब हो गया। वाहन स्टार्ट नहीं होने के कारण पुलिसकर्मियों को काफी देर तक धक्का लगाना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद गाड़ी चालू नहीं हो सकी। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों की भीड़ जुट गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं करने लगे।


जानकारी के अनुसार, एनटीपीसी थाना की पुलिस ढीवर गांव के एक आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत मेडिकल जांच के लिए बाढ़ सदर अस्पताल लेकर पहुंची थी। मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब पुलिस टीम आरोपी को लेकर वापस जाने लगी, तभी सरकारी वाहन ने जवाब दे दिया। कई बार सेल्फ लेने के बावजूद गाड़ी स्टार्ट नहीं हुई।


इसके बाद वाहन में मौजूद पुलिसकर्मी और चालक खुद गाड़ी को धक्का देकर स्टार्ट करने की कोशिश करने लगे। अस्पताल परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने भी मदद की, लेकिन लंबे प्रयास के बाद भी वाहन चालू नहीं हो सका। तेज गर्मी और उमस के बीच धक्का लगाते-लगाते पुलिसकर्मी पसीने से तरबतर हो गए। इस दौरान वहां मौजूद लोग पूरे घटनाक्रम को देखते रहे और कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो भी बनाना शुरू कर दिया।


घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने पुलिस विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि जब पुलिस को ही जर्जर और खराब वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे तो वह अपराध नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई कैसे कर पाएगी। लोगों ने कहा कि अपराधियों की धरपकड़, गश्ती और आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस वाहनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि वाहन बीच रास्ते में ही जवाब दे दें तो पुलिस की कार्यक्षमता प्रभावित होना स्वाभाविक है।


अस्पताल परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि कई थानों में पुराने और खराब हालत वाले वाहन चलाए जा रहे हैं। इससे न केवल पुलिसकर्मियों को परेशानी होती है, बल्कि आम जनता को भी समय पर पुलिस सहायता मिलने में दिक्कत हो सकती है। लोगों ने पुलिस विभाग से वाहनों की नियमित जांच और रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की।


काफी देर तक मशक्कत करने के बाद पुलिस ने एक मैकेनिक को बुलाया। मैकेनिक ने मौके पर पहुंचकर वाहन की तकनीकी जांच की। प्रारंभिक जांच में बैटरी और इंजन से जुड़ी तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई। आवश्यक मरम्मत के बाद वाहन को किसी तरह चालू कराया गया, जिसके बाद पुलिस टीम आरोपी को लेकर वहां से रवाना हो सकी।


हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन घटना ने पुलिस संसाधनों और वाहनों की स्थिति को लेकर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अपराध नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ उनके संसाधनों को भी मजबूत करना जरूरी है।


सदर अस्पताल परिसर में हुई यह घटना भले ही कुछ समय के लिए लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हो, लेकिन इसने पुलिस वाहनों की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस दिशा में क्या कदम उठाता है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो और पुलिस अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सके।