1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 18 Feb 2026 11:59:15 AM IST
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Bihar Politics News : बिहार की सियासत में एक बार फिर सरकारी विभागों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा से जुड़े इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। नालंदा के अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से विधायक जितेंद्र कुमार ने ग्रामीण कार्य विभाग में कथित गड़बड़ी का गंभीर मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने सदन में सवाल किया कि जब किसी ठेकेदार को विभाग द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है, तो उसे फिर से टेंडर कैसे दे दिया गया।
विधायक जितेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत सड़क और अन्य विकास कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन कई मामलों में नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों को दोबारा काम दिए जाने से सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है और इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
विधानसभा में उठे इस सवाल पर विभागीय मंत्री अशोक चौधरी ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को लेकर बिल्कुल भी नरमी नहीं बरतेगी। मंत्री ने कहा कि यदि यह साबित होता है कि किसी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को काम दिया गया है, तो संबंधित इंजीनियर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे मामले में संबंधित इंजीनियर को केवल निलंबित ही नहीं किया जाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे पद से हटाने तक की कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री अशोक चौधरी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो उसकी जांच कराकर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को भी सख्त निर्देश देने की बात कही ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
विधानसभा में इस मुद्दे के उठने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़े अधिकारियों से इस मामले की प्रारंभिक जानकारी मांगी जा सकती है। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध सकता है और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा सकता है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार विकास कार्यों को गति देने का दावा कर रही है। ऐसे में ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों को टेंडर दिए जाने का आरोप सरकार की छवि पर असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि इस मामले की जांच किस स्तर तक पहुंचती है और सरकार दोषियों पर किस तरह की कार्रवाई करती है।
विधानसभा में उठे इस सवाल ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।