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Bihar Fraud Case : इनकम टैक्स में जॉब दिलाने के नाम पर चल रहा था स्कैम, बस इस गलती ने बिगाड़ दिया सारा खेल

Bihar Fraud Case : आयकर विभाग में बिहार- झारखंड के पटना स्थित मुख्य कार्यालय के नाम पर फर्जी बहाली का खुलासा हुआ है। इसके बाद अब इस मामले को लेकर आयकर विभाग ने कोतवाली थाने में एक FIR भी दर्ज कराई है

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 14, 2025, 8:01:07 AM

Bihar Fraud Case

Bihar Fraud Case - फ़ोटो REPOTER

Bihar Fraud Case : बिहार में इन दिनों नौकरी के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। ऐसे में बेरोजगार या फिर नौकरी की तलाश कर रहे हैं युवाओं द्वारा हर तरह की जद्दोजहत की जा रही है। इसी कड़ी में अब एक बड़ा खुलासा हुआ है।


दरअसल, आयकर विभाग में बिहार- झारखंड के पटना स्थित मुख्य कार्यालय के नाम पर फर्जी बहाली का खुलासा हुआ है। इसके बाद अब इस मामले को लेकर आयकर विभाग ने कोतवाली थाने में एक FIR भी दर्ज कराई है और पूरे मामले की गहन जांच करने की बात कही है। आयकर विभाग के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त जयंत मिश्रा ने विज्ञप्ति जारी कर पूरी स्थिति को स्पष्ट किया है। इसमें बताया गया है की बहाली जैसी कोई बात नहीं है यह पूरी तरह से फर्जी मामला है। 


इसमें कहा गया है कि नवंबर 2023 में आयकर विभाग के इस कार्यालय के स्तर से स्पोर्ट कोट के तहत टैक्स सहायक और मल्टी टास्किंग स्टाफ की बहाली के लिए विज्ञापन निकाला गया था। बहाली की पूरी प्रक्रिया नई दिल्ली स्थित कर्मचारी चयन आयोग (SSC )के माध्यम से संपन्न हो चुकी है।


इसके बाद भी फर्जीवाड़ा करने वालों ने इसी विज्ञापन को सिर्फ तारीख बदलकर उसे फिर से जारी कर दिया और इसके नाम पर कुछ लोगों ठगी की योजना थी हालांकि अभी तक किसी के ठगी के शिकार होने की बात  विभाग के समक्ष नहीं आई है। इस मामले में फिलहाल किसी के गिरफ्तार की भी सूचना नहीं है। अब मामले की जांच आयकर विभाग अपने सदस्य पर भी कर रही है ताकि सही आरोपी का खुलासा हो सके।


इधर आयकर विभाग के बिहार झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त कार्यालय में कुछ पदों पर बहाली से संबंधित फर्जी विज्ञापन निकाला गया इसका वितरण चोरी- छिपे कार्यालय के आसपास किया गया। इसके बाद इसमें आवेदन करने वाले कुछ लोगों का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया और तथा कथित संबंध अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए इसी कार्यालय में बुलाए जाने लगा। इसी क्रम में पहली बार बुलाया गया कुछ लोगों से विभाग के पदाधिकारी की मुलाकात हुई और पूरे मामले का खुलासा हुआ। अब इसी व्हाट्सएप ग्रुप को बनाने वाले और उससे जुड़े उन लोगों की पहचान मोबाइल नंबर के आधार पर की जा रही है।