1st Bihar Published by: HARERAM DAS Updated Sep 18, 2025, 11:42:35 AM
गिरिराज सिंह - फ़ोटो FILE PHOTO
Bihar Politics: बिहार में राजनीति का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव को पूरी तरह लूट लिया है। उनका कहना है कि कांग्रेस का बिहार में कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है और वह केवल राजद के सहारे टिके हुए हैं। गिरिराज सिंह ने कहा, “यह कोई तीसरी यात्रा नहीं है, बल्कि राहुल गांधी ने तेजस्वी को बाजार में लूट लिया और खुद को प्रधानमंत्री घोषित कर लिया। जब यह लुट गए, तब इन्हें होश आया और उसी प्रतिक्रिया में यह यात्रा निकाल रहे हैं।”
केंद्रीय मंत्री ने 24 सितंबर को पटना में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस बैठक में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी का बिहार की राजनीति या चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गिरिराज सिंह का दावा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बिहार में एनडीए भारी मतों से विजय हासिल करेगा।
इसी बीच, गृहमंत्री अमित शाह के बेगूसराय आगमन को लेकर गिरिराज सिंह ने कहा कि शाह कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और बैठक में चार जिलों के प्रमुख कार्यकर्ता शामिल होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी। गिरिराज सिंह ने कहा कि एनडीए बेगूसराय की सातों सीटों पर जीत दर्ज करेगी और राज्य में स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आएगी।
गिरिराज सिंह की बयानबाजी से यह स्पष्ट होता है कि एनडीए चुनाव में विपक्ष पर मजबूत दांव खेलना चाहती है। उनका यह भी कहना है कि कांग्रेस और राजद के गठबंधन में कोई सशक्त विकल्प नहीं है, और जनता एनडीए के विकास एजेंडा और स्थिर नेतृत्व को ही महत्व देगी।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि गिरिराज सिंह का यह हमला मुख्य रूप से बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने और विपक्ष को कमजोर दिखाने की रणनीति का हिस्सा है। बेगूसराय में अमित शाह की बैठक और एनडीए के संगठनात्मक प्रयास इस बात की गवाही देते हैं कि राज्य में चुनावी तैयारियाँ पूरी गति से चल रही हैं।
इधर, गिरिराज सिंह की टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि बिहार में चुनावी मुकाबला तेज होने वाला है। एनडीए का फोकस जनता को विकास और स्थिर नेतृत्व के एजेंडे पर केंद्रित करना और विपक्षी दलों की कमजोरी को उजागर करना है। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजे तय करने में यह रणनीति निर्णायक साबित हो सकती है