पटनाः बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की इंटरस्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा के चर्चित प्रश्नपत्र लीक मामले में मंगलवार को अदालत ने बड़ा कदम उठाया। पटना सिविल कोर्ट स्थित निगरानी की विशेष अदालत ने मामले में मौजूद 30 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने खुली अदालत में सभी आरोपियों को उनके खिलाफ दर्ज आरोप पढ़कर सुनाए। आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया, जिसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को अब गवाह पेश करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में जिन प्रमुख आरोपियों पर आरोप तय हुए हैं, उनमें BSSC के तत्कालीन सचिव परमेश्वर राम, ओएमआर शीट की छपाई का ठेका लेने वाली एजेंसी के संचालक आनंद प्रीत सिंह बराड़, कथित मास्टरमाइंड आशीष रंजन के अलावा आलोक रंजन, अटल बिहारी राय, ओम प्रकाश गुप्ता, शीलभद्र गुप्ता, अविनाश कुमार, रामाशीष सिंह और अनीस कुमार समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।
मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, BSSC इंटरस्तरीय परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कथित तौर पर कई स्तरों पर मिलीभगत का नेटवर्क काम कर रहा था। जांच रिपोर्ट में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष सुधीर कुमार, सचिव परमेश्वर राम, प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग का ठेका लेने वाले विनीत अग्रवाल और ओएमआर शीट छापने वाले आनंद प्रीत सिंह बराड़ की भूमिका को अहम बताया गया है।
जांच के अनुसार, प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट तैयार होने के बाद प्रिंटरों ने सभी सेट तत्कालीन अध्यक्ष सुधीर कुमार तक पहुंचाए। आरोप है कि इसके बाद प्रश्नपत्र सुधीर कुमार के भांजे आशीष और भाभी मंजू तक पहुंचा। जांच में यह भी सामने आया कि सुधीर कुमार के परिवार के पांच सदस्य परीक्षा में अभ्यर्थी थे और इसकी जानकारी सरकार से छिपाई गई थी।
इसके बाद कथित तौर पर आशीष रंजन ने प्रश्नपत्र को राजीव नगर स्थित एवीएन स्कूल के संचालक रामाशीष राय तक पहुंचाया। इसी स्कूल में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। आरोप है कि आशीष और रामाशीष ने मिलकर कई अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल की और उन्हें प्रश्नपत्र तथा आंसर-की उपलब्ध कराई। दूसरी ओर, जांच में यह आरोप भी सामने आया कि मंजू ने अपने रिश्तेदारों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया था।
दिल्ली में मिले लोकेशन ने भी बढ़ाया शक
पेपर लीक की जांच के दौरान प्रिंटिंग से जुड़े लोगों की गतिविधियों ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा। जांच में तत्कालीन अध्यक्ष सुधीर कुमार और दोनों प्रिंटर विनीत अग्रवाल एवं आनंद प्रीत सिंह बराड़ की लोकेशन दिल्ली में एक साथ मिलने की बात सामने आई।
नियम के मुताबिक प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट की प्रिंटिंग करने वाले अलग-अलग प्रिंटरों को एक-दूसरे की पहचान और काम की जानकारी से अनजान रहना था। लेकिन जांच में आरोप है कि दोनों प्रिंटर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रश्नपत्र लीक होने में प्रिंटिंग स्तर से भी भूमिका सामने आई।
41 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ था आरोपपत्र
विशेष लोक अभियोजक आनंदी सिंह के मुताबिक, इस मामले में अगमकुआं थाने में वर्ष 2017 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के बाद आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व आईएएस सुधीर कुमार समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
हालांकि, सुधीर कुमार समेत 10 आरोपियों के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण मामले की सुनवाई आगे बढ़ने में देरी हो रही थी। अब अदालत ने इन 10 आरोपियों से संबंधित अभिलेख मूल मामले से अलग कर दिए हैं। इसके बाद जो 30 आरोपी अदालत में मौजूद थे, उनके खिलाफ आरोप गठन की कार्रवाई पूरी की गई।
5 घंटे पहले वायरल हो गया था प्रश्नपत्र
BSSC इंटरस्तरीय परीक्षा का यह मामला वर्ष 2017 में उस समय सुर्खियों में आया, जब परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रश्नपत्र और आंसर-की सोशल मीडिया तथा वाट्सऐप पर वायरल होने लगे थे। 5 फरवरी 2017 को दूसरे चरण की परीक्षा शुरू होने से करीब पांच घंटे पहले प्रश्नपत्र और आंसर-की वायरल होने की खबर सामने आई। नवादा के एक परीक्षा केंद्र पर नकल करते कई अभ्यर्थियों के पकड़े जाने के बाद मामला और गंभीर हो गया। इसके बाद पूरे बिहार में परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे।
6 फरवरी को पटना में छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया। मामले की जांच के लिए तत्कालीन एसएसपी मनु महाराज के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। जांच आगे बढ़ी तो 8 फरवरी 2017 को तत्कालीन एएसपी राकेश दुबे की टीम ने BSSC के तत्कालीन सचिव परमेश्वर राम के आवास पर छापेमारी की। जांच टीम ने वहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए और परमेश्वर राम को गिरफ्तार कर लिया। बढ़ते विवाद के बीच सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया।
इसके बाद जांच की आंच तत्कालीन BSSC अध्यक्ष सुधीर कुमार तक पहुंची। 24 फरवरी 2017 को जांच में पुख्ता साक्ष्य मिलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। करीब नौ साल पुराने इस बहुचर्चित पेपर लीक मामले में अब 30 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन हो चुका है। आरोपियों के इनकार के बाद मुकदमे का अगला महत्वपूर्ण चरण गवाहों की गवाही और साक्ष्यों की पेशी होगी। ऐसे में अब अदालत में होने वाली सुनवाई यह तय करने में अहम होगी कि जांच में सामने आए आरोप और साक्ष्य अदालत में किस तरह साबित होते हैं।





