1st Bihar Published by: First Bihar Updated Tue, 10 Feb 2026 11:50:42 AM IST
- फ़ोटो
Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में आज का सत्र काफी चर्चा का विषय बन गया, जब विपक्ष के सभी विधायक वॉक आउट कर गए। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही यह नजारा देखने को मिला। इसी बीच प्रश्नोत्तर काल में राजद की वारसलीगंज विधायक अनीता अचानक वापस आई तो सवाल किया। विधानसभा अध्यक्ष ने उनके सवाल पर पूरक पूछने की अनुमति दी, जिसके बाद अनीता जी सदन में उपस्थित हुईं और सरकार के विभागीय मंत्री से अपने सवाल पूछने लगीं।
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस स्थिति पर चुटकी ली और कहा कि आज सदन में वॉक आउट करने का एक नया रूप देखने को मिला। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सभी साथी वॉक आउट कर गए, लेकिन हमें उनके अधिकारों को चुनौती नहीं दे रहे हैं। सदन में आकर सवाल पूछना उनका संवैधानिक अधिकार है और सरकार भी चाहती है कि सदन में रहे और सवाल पूछे जाएं, ताकि सरकार उत्तर दे सके।
विजय कुमार चौधरी ने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले भी एक सदस्य ललन जी अकेले बैठे थे, उनका प्रश्न आया, उन्होंने उसे पूछ लिया और सरकार ने उसका उत्तर दिया। इसके बाद वह सदस्य संतुष्ट होकर बाहर चले गए। इसी तरह अनीता जी आईं और अपने सवाल पूछने का पूरा अधिकार उन्होंने इस्तेमाल किया। मंत्री ने कहा कि सरकार उनके अधिकार का सम्मान करती है और उन्हें स्वागत किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि आज का वॉक आउट अलग तरह का था, जिसमें सदन से बाहर जाने के बाद भी सवाल पूछने का प्रयास किया गया। इसे मंत्री ने ‘नई परिभाषा’ बताया और कहा कि यह तरीका सदन की गरिमा और परंपरा के अनुसार नहीं है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि सदन की कार्यवाही में शामिल होना और सवाल पूछना ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सही तरीका है।
संसदीय कार्य मंत्री ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि सवाल पूछना और उत्तर देना ही लोकतंत्र की मूल भावना है। किसी भी सदस्य को इसका अधिकार है और सरकार हमेशा इस अधिकार का सम्मान करेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी सदन में रहकर अपनी बात रखे तो बेहतर होगा, बजाय इसके कि वॉक आउट करके बहस को टालने की कोशिश की जाए।
आज की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिहार विधानसभा में सदस्यों के अधिकार और जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। अनीता जी का सवाल पूछना और मंत्री का स्वागत इस बात का उदाहरण है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में नियम और अधिकारों का पालन करना कितना महत्वपूर्ण है। इस पूरे घटनाक्रम ने सदन की कार्यप्रणाली और विपक्ष के रवैये पर नया प्रकाश डाला, जिसे राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों ही नजरियों से देखा जा रहा है।