Bihar Road Accidents: बिहार में सड़क नेटवर्क और कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ सड़क हादसों की संख्या भी चिंता बढ़ाने लगी है। राज्य में तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। वर्ष 2025 की वार्षिक सड़क दुर्घटना रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में सड़क हादसों में वर्ष 2024 की तुलना में 5.52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, इन दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या में 6.12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में बिहार की विभिन्न सड़कों पर कुल 12,253 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके मुकाबले वर्ष 2024 में 11,612 दुर्घटनाएं हुई थीं। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर दिन बड़ी संख्या में लोग सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरस्पीडिंग, लापरवाही से वाहन चलाना और गलत तरीके से ओवरटेक करना दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।
मृत्यु दर में हुई वृद्धि ने भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हादसों की गंभीरता लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट, सख्त ट्रैफिक नियमों का पालन और जनजागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।
इसी चुनौती से निपटने के लिए बिहार सरकार ने राज्यभर में अत्याधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने की योजना शुरू की है। 6 जून को जारी इस योजना के तहत पहले चरण में 200 और दूसरे चरण में 300 महत्वपूर्ण स्थानों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
आईटीएमएस के जरिए ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट वाहन चलाना, मोबाइल फोन का उपयोग, गलत दिशा में ड्राइविंग, ट्रिपल राइडिंग और अवैध पार्किंग जैसे ट्रैफिक नियम उल्लंघनों की स्वतः पहचान की जाएगी। इससे नियम तोड़ने वालों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
सरकार ने आम नागरिकों को भी 'सड़क सुरक्षा प्रहरी' बनने का अवसर दिया है। इसके लिए व्हाट्सएप नंबर 9153971897 और ईमेल आईडी commandcontrolecenterbihar@gmail.com जारी की गई है। नागरिक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की फोटो या वीडियो सीधे विभाग को भेज सकते हैं। शिकायतों के आधार पर वाहन और चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जबकि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।


