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Bihar News : बिहार के प्राइमरी स्कूलों में बड़ा बदलाव! अब भोजपुरी, मगही, मैथिली समेत क्षेत्रीय भाषाओं में होगी पढ़ाई

बिहार के प्राथमिक स्कूलों में अब भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई की तैयारी शुरू हो गई है। SCERT की बैठक में शिक्षा मंत्री ने मातृभाषा आधारित शिक्षा लागू करने के निर्देश दिए।

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Tejpratap
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Bihar Schools  : बिहार के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई का तरीका जल्द बदल सकता है। अब छोटे बच्चों को सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि उनकी क्षेत्रीय मातृभाषा में भी शिक्षा देने की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों को उनकी स्थानीय भाषा में पढ़ाने से सीखने की क्षमता बेहतर होगी और शिक्षा अधिक सहज एवं प्रभावी बनेगी।


बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बिहार भाषाई विविधता वाला राज्य है। यहां भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका, बज्जिका समेत कई क्षेत्रीय भाषाएं बड़े पैमाने पर बोली जाती हैं। ऐसे में शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने से वे पढ़ाई को आसानी से समझ पाएंगे और स्कूल से उनका जुड़ाव भी मजबूत होगा।


नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल

यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की भावना के अनुरूप माना जा रहा है। नई शिक्षा नीति में भी प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा या स्थानीय भाषा में देने की सिफारिश की गई है। इसी दिशा में बिहार सरकार अब पाठ्य सामग्री तैयार करने, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षण व्यवस्था विकसित करने की योजना पर काम करेगी।


किन भाषाओं में होगी पढ़ाई?

प्रारंभिक चरण में भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका और बज्जिका जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। जिस क्षेत्र में जो भाषा प्रमुख रूप से बोली जाती है, वहां उसी भाषा के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे बच्चों को भाषा की वजह से होने वाली शुरुआती कठिनाइयों से राहत मिलेगी।


SCERT तैयार करेगा रोडमैप

बैठक में SCERT को निर्देश दिया गया कि वह इस पूरी योजना का विस्तृत रोडमैप तैयार करे। इसके तहत पाठ्यपुस्तकों के विकास, स्थानीय भाषा आधारित शिक्षण सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली पर भी काम किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत बनाया जाए और ड्रॉपआउट दर में कमी लाई जाए।


विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक कदम

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे अपनी मातृभाषा में नई चीजें जल्दी सीखते हैं। जब शुरुआती शिक्षा परिचित भाषा में मिलती है तो उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे कक्षा में अधिक सक्रिय रहते हैं। बाद में हिंदी और अंग्रेजी जैसी अन्य भाषाओं को सीखना भी उनके लिए आसान हो जाता है।


शिक्षकों की भूमिका होगी अहम

इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। उन्हें स्थानीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई के साथ-साथ हिंदी और अन्य विषयों की शिक्षा भी संतुलित रूप से जारी रहे।


शिक्षा व्यवस्था में आएगा नया बदलाव

बिहार सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने का यह प्रयास बच्चों को उनकी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान से भी जोड़ेगा। साथ ही स्कूलों में सीखने का वातावरण अधिक सहज और रोचक बनेगा। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो आने वाले समय में बिहार के लाखों प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।