1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sep 20, 2025, 1:18:04 PM
प्रशांत किशोर - फ़ोटो FILE PHOTO
Bihar News: प्रशांत किशोर के खुलासे से सत्ता पक्ष में खलबली मची है. शुक्रवार को उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक साथ भाजपा और जदयू के कई नेताओं के बारे में बड़ा खुलासा किया है। इसके बाद बिहार की राजनीतिक तपिश बढ़ गई है। प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीके ने खुलासा किया है कि जब कोरोना का संकट था, तब स्वास्थ्य मंत्री संपति अर्जन कर रहे थे । कहने को वह कर्ज लेकर दिल्ली फ्लैट खरीद रहे थे, लेकिन इसी दौरान उनकी पत्नी के बैंक अकाउंट में 2 करोड़ 12 लाख रुपए आए । यह रुपए कहां से आए, मंगल पांडे को जवाब देना चाहिए।
इसी कड़ी में आज भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पाठक और प्रदेश प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशांत किशोर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। भाजपा के तरफ से कहा गया है कि 19 मार्च 2025 को प्रशांत किशोर (PK) की बहन और उदय सिंह (Ex-MP) के पुत्र अभिनव सिंह ने JSPT Consultants Private Limited नाम की एक कंपनी खोली। दो महीने बाद 19.5.2025 को उदय सिंह जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष बने। उदय सिंह के अध्यक्ष बनने के दस दिनों के अन्दर 11 करोड़ 80 लाख रुपये TRANSFER किया।
फिर जून 2025 में 11 करोड़ 80 लाख एवं जुलाई 2025 में 26 करोड़ 50 लाख दिए । इस तरह दो महीने में 50 करोड़ से ज्यादा रुपये मिले। मात्र दो महीने पुरानी एक निर्माण कंपनी को ऐसी कौन सी तीसमार सलाह दे डाली की उस एजेंसी ने 50 करोड़ दे डाले। इसके बाद खुदरा रूप में और 47 करोड़ रुपये इन्हें अगस्त 2025 में प्राप्त हुए। अब तक उन्हें 100 करोड़ से ज्यादा रुपये मिल चुके हैं. पर किस एवज में, पता नहीं? यह जन सुराज के अकूत काले धन को उजला करने का एक नया शातिर रास्ता है।
भाजपा ने आगे खुलासा किया है कि, एक हैं शरत कुमार मिश्रा. ये जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष हुआ करते थे. ये प्रशांत किशोर के बिज़नेस पार्टनर या यूं कहिये कि उनके मुखौटा हैं. ये कई कंपनियों के डायरेक्टर हैं जो 27.8.2022 को बनायीं गयी थी। यह कर्नाटक में रजिस्टर्ड है। इस फाउंडेशन को वर्ष 2023-24 में 18 करोड़ एवं वर्ष 2024-25 में 48 करोड़ 75 लाख रुपये Voluntary Contribution and anonymous donations के रूप में प्राप्त हुए। इनके बड़े donors में शराब कंपनियां, निर्माण कम्पनियाँ एवं कई फर्जी entities शामिल हैं। इतनी बड़ी राशि इन्हें कौन दे रहा है, क्यों दे रहा है. ये रिश्ता क्या कहलाता है? यह टैक्स चोरी, proxy payment और money laundering का भयानक मामला है।