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Bihar News: बिहार में साइबर ठगी की राशि अब बिना FIR के ही मिलेगी? हाई कोर्ट भेजा गया प्रस्ताव

Bihar News: बिहार में साइबर ठगी के पीड़ितों को आने वाले समय में बिना FIR के ही राशि रिफंड की सुविधा जल्द मिल सकती है। आर्थिक अपराध इकाई ने पटना हाई कोर्ट को प्रस्ताव भेजा। ऑनलाइन शिकायत और एक्शन टेकेन रिपोर्ट के आधार पर होगा रिफंड।

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प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब राशि वापसी के लिए प्राथमिकी दर्ज कराना अनिवार्य नहीं होगा। आर्थिक अपराध इकाई ने ऑनलाइन शिकायत और एक्शन टेकेन रिपोर्ट के आधार पर रिफंड की प्रक्रिया को आसान करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे राज्य सरकार के माध्यम से पटना हाई कोर्ट में भेजा गया है।


यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो पीड़ितों को ठगी की राशि वापस पाने में आसानी होगी और प्रक्रिया तेज होगी। साइबर डीआईजी संजय कुमार ने बताया कि जनवरी से जून 2025 तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 15 लाख 62 हजार कॉल प्राप्त हुए, जिनमें 38,472 वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित थे। इनमें 47.10 करोड़ रुपये की राशि होल्ड कराई गई और 3.64 करोड़ रुपये पीड़ितों को रिफंड किए गए।


हालांकि, रिफंड राशि का प्रतिशत कम होने का कारण ऑनलाइन शिकायतों का FIR में तब्दील न होना है। NCRP पर 85% शिकायतें ऑनलाइन दर्ज होती हैं, लेकिन नियम के अनुसार तीन दिनों के भीतर हस्ताक्षर के साथ FIR दर्ज कराना जरूरी है। कई लोग इस प्रक्रिया का पालन नहीं करते, जिससे रिफंड में देरी होती है। ईओयू के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों में FIR की अनिवार्यता नहीं है और वहां एक्शन टेकेन रिपोर्ट के आधार पर राशि रिफंड की जाती है। अब बिहार में भी इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पटना हाई कोर्ट को प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव के मंजूर होने पर पीड़ितों को त्वरित राहत मिलेगी, क्योंकि ऑनलाइन शिकायत के आधार पर ही बैंकों और जांच एजेंसियों के साथ समन्वय कर राशि वापस की जा सकेगी।


साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए ईओयू ने एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है, जिसमें आईटी एक्ट के तहत साइबर अपराधों की जांच दारोगा रैंक के अधिकारियों को सौंपने की मांग की गई है। वर्तमान में केवल इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही इन मामलों की जांच करते हैं, लेकिन केसों की बढ़ती संख्या के कारण जांच में देरी हो रही है। बिहार सहित कई राज्यों ने केंद्र से आईटी एक्ट में संशोधन कर दारोगा को अनुसंधान पदाधिकारी (IO) बनाने की अनुमति मांगी है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और इंस्पेक्टरों पर काम का बोझ कम होगा।


बिहार में साइबर अपराधों की गंभीरता को देखते हुए ईओयू ने हाल के वर्षों में कई बड़े ऑपरेशन किए हैं। जुलाई में पटना जंक्शन से 100 करोड़ रुपये के सहकारी बैंक धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी सैयद शाहनवाज वजी को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह सुपौल और वैशाली से अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के सरगना हर्षित कुमार सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये गिरोह देश-विदेश में सक्रिय थे और फर्जी सिम, वीओआईपी कॉल और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी करते थे। इन सफलताओं के बावजूद रिफंड प्रक्रिया में FIR की अनिवार्यता एक बड़ी बाधा रही है, जिसे हटाने का प्रयास अब किया जा रहा है।

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