1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 30 Jan 2026 08:47:29 AM IST
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Bihar Government : बिहार सरकार ने अपने सरकारी कर्मचारियों के इंटरनेट मीडिया और मैसेजिंग एप्लीकेशन उपयोग को लेकर सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य इंटरनेट मैसेजिंग एप्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने बिहार सेवक आचार संहितावली, 1976 में संशोधन कर स्पष्ट मानक तय कर दिए हैं। इसका उद्देश्य सरकारी सेवकों की ऑनलाइन गतिविधियों में जिम्मेदारी और मर्यादा सुनिश्चित करना और प्रशासन की निष्पक्षता एवं सुचारू कार्यप्रणाली बनाए रखना है।
नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह प्रस्ताव स्वीकृत किया गया कि सरकारी सेवक अब इंटरनेट मीडिया पर सरकारी पहचान का प्रयोग नहीं कर सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्रन ने बताया कि संशोधन के अनुसार अब किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए यह मुमकिन नहीं होगा कि वह सरकारी पद या पहचान का उपयोग कर सोशल मीडिया पर खाता बनाए या सामग्री साझा करे।
सरकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत अकाउंट के माध्यम से भी ऐसी कोई पोस्ट, टिप्पणी या सामग्री साझा करना वर्जित रहेगा, जिससे सरकार की नीतियों या कार्य प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़े या प्रशासन की छवि धूमिल हो। नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी सेवकों के व्यक्तिगत विचार और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच किसी प्रकार का विरोधाभास दिखाने वाली सामग्री प्रकाशित नहीं की जा सकेगी।
सरकार ने यह भी सख्ती से कहा है कि किसी भी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करना पूरी तरह वर्जित रहेगा। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक या अनुचित टिप्पणी करना भी निषेध होगा। इस कदम का मकसद प्रशासनिक अनुशासन को बनाए रखना और जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने से रोकना है।
यदि कोई सरकारी कर्मचारी इन प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभागीय कार्रवाई भी संचालित की जा सकती है। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में कोई समझौता नहीं करेगी और सभी सरकारी कर्मचारियों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
इसी के साथ सरकार ने गुमनाम इंटरनेट मीडिया खातों के संचालकों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कोई भी सरकारी सेवक फर्जी नाम या पहचान का उपयोग कर सोशल मीडिया में शामिल नहीं हो सकेगा। इसके अलावा किसी भी सरकारी पदाधिकारी की आलोचना, संवेदनशील जानकारी या कार्य से संबंधित विवरण इंटरनेट मीडिया पर साझा करना पूरी तरह वर्जित होगा।
विशेष रूप से यह संशोधन उस समय आया है जब सोशल मीडिया पर कई बार सरकारी नीतियों और निर्णयों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे प्रशासनिक कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग न केवल प्रशासनिक अनुशासन को प्रभावित करता है, बल्कि जनता के बीच गलतफहमी और भ्रम की स्थिति भी पैदा करता है।
इस कदम से यह संदेश स्पष्ट होता है कि बिहार सरकार अपने सरकारी कर्मचारियों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नियंत्रण रखेगी और उन्हें जिम्मेदारीपूर्वक सोशल मीडिया का उपयोग करने के लिए बाध्य करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल सरकारी कर्मचारियों में डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ जिम्मेदारी बढ़ाने में मदद करेगी और प्रशासन की छवि को सुरक्षित रखेगी।
सरकारी सेवकों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय हमेशा अपने पेशेवर कर्तव्यों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखें। नियमावली का पालन न करने पर विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस निर्णय से साफ है कि बिहार सरकार प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कड़ा रुख अपना रही है। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी सेवक अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करते समय भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और मर्यादा को ध्यान में रखें और जनता के बीच प्रशासन की छवि को सम्मानजनक बनाए रखें।