Bihar expressway : बिहार में 5 एक्सप्रेस-वे बनाने की रणनीति तैयार करने महाराष्ट्र-यूपी और गए सीनियर अफसर, जानिए क्या है ताजा अपडेट

Bihar expressway : बिहार सरकार ‘सात निश्चय-3’ के तहत पांच नए एक्सप्रेस-वे बनाने की तैयारी में है। महाराष्ट्र और यूपी की अध्ययन यात्रा के बाद फंडिंग व रूट तय होंगे, जिससे पटना तक यात्रा समय घटेगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 23 Jan 2026 12:37:29 PM IST

Bihar expressway : बिहार में 5 एक्सप्रेस-वे बनाने की रणनीति तैयार करने महाराष्ट्र-यूपी और गए सीनियर अफसर, जानिए क्या है ताजा अपडेट

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Bihar expressway : बिहार में सड़क नेटवर्क को बेहतर और तेज़ बनाने के लिए राज्य सरकार ‘सात निश्चय-3’ के तहत पांच नए एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि एक्सप्रेस-वे निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और दो वरिष्ठ इंजीनियरों को महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश भेजा गया है। इस अध्ययन के बाद ही फंडिंग और निर्माण क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा।


महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने अपने स्तर पर एक्सप्रेस-वे निर्माण किया है। वहां एक्सप्रेस-वे निर्माण के लिए ‘एक्सप्रेस-वे कंस्ट्रक्शन अथॉरिटी’ का गठन किया गया है। बिहार सरकार भी इसी मॉडल पर अपने स्तर पर एक्सप्रेस-वे निर्माण प्राधिकरण बनाने पर विचार कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जिलों को जोड़ना, पटना तक यात्रा समय कम करना और बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण से बचना है।


पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि एक्सप्रेस-वे के निर्माण में यह ध्यान रखा जाएगा कि एक जिले को कई जिलों की संपर्कता उपलब्ध हो और संबंधित इलाके से पटना पहुंचने में समय कम लगे। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि किस इलाके में एक्सप्रेस-वे का निर्माण सबसे ज्यादा प्रभावी और फायदेमंद होगा।


फंडिंग के मामले में भी राज्य सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है। अधिकारी महाराष्ट्र और यूपी से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर तय करेंगे कि एक्सप्रेस-वे का निर्माण राज्य सरकार अपने स्तर से करेगी या किसी साझेदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किन जिलों और किन मार्गों पर एक्सप्रेस-वे का निर्माण पहले प्राथमिकता में होगा।


बिहार में फिलहाल केंद्र सरकार के स्तर पर चार एक्सप्रेस-वे निर्माण प्रस्तावित हैं, जो अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में हैं। इनमें से सबसे प्रमुख है पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस एक्सप्रेस-वे को एक्सप्रेस-वे नंबर भी आवंटित कर दिया है। यह परियोजना बिहार के पूर्वी हिस्से को राजधानी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


वहीं, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है और इसका बड़ा हिस्सा बिहार से होकर गुजर रहा है। यह परियोजना बिहार को उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित होगी। एक और महत्वपूर्ण परियोजना रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे है, जिसे भी केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है। इस एक्सप्रेस-वे से बिहार के साथ-साथ नेपाल को भी पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह की संपर्कता मिलेगी। इससे नेपाल-भारत व्यापार में तेजी आने की उम्मीद है और बिहार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।


चौथा प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे वाराणसी-रांची-कोलकाता है। यह परियोजना लंबी अवधि तक बिहार वाले हिस्से में जमीन अधिग्रहण के कारण रुकी हुई थी। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू हो गया है। पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ‘सात निश्चय-3’ के तहत एक्सप्रेस-वे निर्माण बिहार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण कदम है। इन एक्सप्रेस-वे के बन जाने से राज्य में व्यापार, उद्योग, कृषि और पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही, राजधानी पटना से अन्य जिलों की दूरी कम होने से लोगों को समय और लागत दोनों में राहत मिलेगी।


इस योजना के पूरा होने पर बिहार की सड़कें न केवल बेहतर होंगी, बल्कि राज्य का विकास भी तेज़ी से आगे बढ़ेगा। इस दिशा में अधिकारियों की अध्ययन यात्रा और प्राधिकरण निर्माण की योजना से यह संकेत मिलता है कि बिहार सरकार इस परियोजना को गंभीरता से लेकर जल्द ही क्रियान्वित करने की तैयारी में है।