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Anant Singh पटना स्नातक सीट पर JDU में घमासान! नीरज कुमार को हरवाएंगे बाहुबली अनंत सिंह , विपक्षी कैंडिडेट को दिया खुला समर्थन...

पटना स्नातक MLC चुनाव से पहले JDU में सियासी हलचल तेज हो गई है। अनंत सिंह ने मौजूदा MLC नीरज कुमार का साथ देने से इनकार कर डॉ. अनुज सिंह को समर्थन दिया है। क्या ‘छोटे सरकार’ का दांव चुनावी समीकरण बदल देगा?

Anant Singh पटना स्नातक सीट पर JDU में घमासान! नीरज कुमार को हरवाएंगे  बाहुबली अनंत सिंह , विपक्षी कैंडिडेट को दिया खुला समर्थन...
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर चुनाव अभी घोषित भी नहीं हुआ है, लेकिन सियासी तापमान चढ़ने लगा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस बार मुकाबले की गर्मी विपक्ष से ज्यादा JDU के भीतर से उठती दिखाई दे रही है। मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और मौजूदा MLC नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।

अनंत सिंह ने आगामी विधान परिषद चुनाव में डॉ. अनुज सिंह को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह नीरज कुमार का साथ नहीं देंगे। अब सवाल यह है कि यह सिर्फ एक स्थानीय राजनीतिक पसंद है या इसके पीछे JDU के भीतर चल रही किसी बड़ी सियासी खींचतान की कहानी छिपी है?

‘जो मेरे साथ रहेगा, हम उसका साथ देंगे’—अनंत सिंह का बड़ा बयान

गुरुवार को अनंत सिंह बाढ़ के बेड़ना गांव पहुंचे थे। जहरीली शराब पीने से यहां चार लोगों की मौत हुई थी। अनंत सिंह चार दिनों में दूसरी बार पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने परिवारों से मुलाकात की और आर्थिक मदद भी की।उनके साथ डॉ. अनुज सिंह और बाढ़ से विधायक डॉ. सियाराम सिंह भी मौजूद थे। पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद जब मीडिया ने आगामी MLC चुनाव को लेकर सवाल किया तो अनंत सिंह ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने पटना की स्नातक सीट के चुनावी समीकरण को चर्चा में ला दिया।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में हैं और नीरज कुमार का साथ नहीं देंगे। अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि 26 विधानसभा क्षेत्रों में उनके समर्थक डॉ. अनुज सिंह के साथ खड़े होंगे। अनंत सिंह ने कहा - यह हमारे साथ अनुज सिंह है यह नीरज कुमार के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे तो हम यही कहेंगे कि हमारे जितने आदमी हैं 26 विधानसभा में इनका ही साथ देगा। 

वहीँ नीरज कुमार मुझे खुद जदयू के प्रत्याशी हो सकते हैं और उनके समर्थन नहीं देने पर अनत सिंह ने कहा जो मेरा साथ नहीं देगा उसका हम साथ क्यों देंगे। हमारा एक-एक आदमी अनुज सिंह के समर्थन में रहेगा। 26 विधानसभा में जितना आदमी मेरा समर्थन है सभी आपको सड़क पर उनके लिए वोट मांगते हुए नजर आ जाएगा। यानी चुनाव अभी आया नहीं, अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई, उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है—लेकिन समर्थन की राजनीति का बिगुल जरूर बज गया है।

क्या JDU के ‘अपने’ ही बनेंगे चुनौती?

पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में उनके सामने इस बार जीत का चौका लगाने की चुनौती है। लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ विपक्ष से होगी या अपने ही खेमे से भी?यही सबसे बड़ा सवाल है।अनंत सिंह और नीरज कुमार दोनों JDU से जुड़े बड़े चेहरे हैं। ऐसे में एक ही पार्टी के दो प्रभावशाली नेताओं का अलग-अलग उम्मीदवारों के साथ खड़ा होना निश्चित तौर पर राजनीतिक चर्चा को हवा देता है।हालांकि, इसे सीधे तौर पर पार्टी के भीतर बगावत कहना अभी जल्दबाजी होगी। JDU ने 2026 के पटना स्नातक चुनाव के लिए आधिकारिक तौर पर अंतिम उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।लेकिन राजनीति में सवाल सिर्फ घोषणा का नहीं होता, संकेतों का भी होता है।और अनंत सिंह का यह संकेत काफी साफ दिखाई दे रहा है।

डॉ. अनुज सिंह को समर्थन से कितना बदलेगा खेल?

अब असली सवाल डॉ. अनुज सिंह को लेकर है।अगर डॉ. अनुज सिंह मैदान में उतरते हैं और अनंत सिंह उनके लिए सक्रिय रूप से प्रचार करते हैं, तो क्या पटना स्नातक सीट का मुकाबला नीरज कुमार के लिए मुश्किल हो सकता है?मोकामा और आसपास के इलाकों में अनंत सिंह की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उनके समर्थन को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनके समर्थकों ने तो यहां तक कहा कि ‘जिसके साथ छोटे सरकार, उसकी जीत तय।’डॉ. अनुज सिंह ने भी समर्थन मिलने के बाद आत्मविश्वास दिखाते हुए कहा कि जब दादा का समर्थन मिल गया तो फिर चिंता किस बात की।लेकिन चुनावी राजनीति में सिर्फ समर्थन से जीत तय नहीं होती। खासकर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग होता है।यहां जातीय समीकरण, व्यक्तिगत संपर्क, संगठन, मतदाता सूची, शिक्षित मतदाताओं के बीच पकड़ और बूथ स्तर की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।तो क्या अनंत सिंह का प्रभाव इस अलग तरह के चुनाव में भी उतना ही असरदार साबित होगा? यही देखने वाली बात होगी।

नीरज कुमार के सामने ‘जीत का चौका’ या नई चुनौती?

नीरज कुमार पटना स्नातक सीट से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। जाहिर है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका चुनावी अनुभव और लंबे समय से निर्वाचन क्षेत्र में सक्रियता होगी।लेकिन इस बार उनके सामने सवाल अलग है।क्या वह चौथी बार भी जीत हासिल कर पाएंगे?या फिर डॉ. अनुज सिंह की संभावित चुनौती और अनंत सिंह के समर्थन से चुनावी समीकरण बदल जाएगा?और इससे भी बड़ा सवाल—क्या नीरज कुमार को चुनौती विपक्ष देगा या उनके सामने चुनौती उनके अपने राजनीतिक खेमे से खड़ी होगी?

पटना स्नातक सीट पर किसे वोट देंगे ‘स्नातक मतदाता’?

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य विधानसभा मतदाता मतदान नहीं करते हैं। यहां निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले स्नातक मतदाता वोट करते हैं।नियमों के अनुसार संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और निर्धारित समय से पहले कम से कम तीन साल से स्नातक होना जैसी पात्रताएं जरूरी होती हैं।यानी यह चुनाव आम विधानसभा चुनाव से अलग है।इसलिए अनंत सिंह के समर्थकों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि उनका प्रभाव पात्र स्नातक मतदाताओं तक कितना पहुंचता है।क्या समर्थक वास्तव में वोट में बदल पाएंगे?क्या डॉ. अनुज सिंह स्नातक मतदाताओं के बीच अपना मजबूत नेटवर्क बना पाएंगे?और क्या नीरज कुमार अपनी पुरानी चुनावी पकड़ को बरकरार रख पाएंगे?

नवंबर में खाली होंगी 8 MLC सीटें, कई मोर्चों पर मुकाबला

बिहार में 2026 में विधान परिषद की कुल आठ सीटों पर नियमित चुनाव होना है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी स्नातक सीटों के साथ पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी इस चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है।फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है। सितंबर में कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। इसके बाद नामांकन से लेकर नाम वापसी और मतदान की तारीख सामने आएगी।

जन सुराज की एंट्री से मुकाबला होगा और दिलचस्प?

इस चुनाव को सिर्फ JDU बनाम किसी एक उम्मीदवार की लड़ाई मानना भी सही नहीं होगा। जन सुराज भी बिहार की इन आठ विधान परिषद सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है।अगर जन सुराज मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारता है, तो मुकाबला और बहुकोणीय हो सकता है।ऐसे में पटना स्नातक सीट पर एक तरफ नीरज कुमार का अनुभव होगा, दूसरी तरफ डॉ. अनुज सिंह को मिल रहा समर्थन और तीसरी ओर नए राजनीतिक विकल्प की कोशिश।यानी चुनाव से पहले ही पटना स्नातक सीट पर राजनीति ने करवट लेनी शुरू कर दी है।

सबसे बड़ा सवाल—क्या यह सिर्फ ‘समर्थन’ है या JDU के भीतर संदेश?

अनंत सिंह का बयान कई स्तरों पर देखा जा रहा है।उन्होंने सीधे तौर पर नीरज कुमार का नाम लेकर समर्थन से इनकार किया है। यह सामान्य राजनीतिक बयान है या इसके पीछे कोई गहरी नाराजगी है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।लेकिन इतना जरूर है कि इस बयान ने एक बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है—क्या JDU के भीतर सब कुछ ठीक चल रहा है?क्या नीरज कुमार को चौथी जीत के लिए विपक्ष से ज्यादा अपने ही खेमे के असंतोष से लड़ना पड़ेगा?क्या अनंत सिंह का समर्थन डॉ. अनुज सिंह को मजबूत दावेदार बना देगा?और सबसे अहम—क्या ‘छोटे सरकार’ का समर्थन स्नातक मतदाताओं के बीच वोट में बदल पाएगा?

फिलहाल इन सवालों का जवाब चुनाव की घोषणा और उम्मीदवारों के मैदान में उतरने के बाद ही मिलेगा। लेकिन एक बात साफ है—पटना स्नातक सीट का चुनाव इस बार सिर्फ एक MLC चुनाव नहीं रहने वाला। यह JDU के भीतर ताकत, प्रभाव और राजनीतिक पकड़ की भी परीक्षा बन सकता है।