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20 रुपये की थाली से 2.5 करोड़ के टर्नओवर तक, पटना की देवनी देवी की सफलता की कहानी

पटना की देवनी देवी ने 20 रुपये की थाली से ‘अम्मा किचन’ की शुरुआत की। आज दो आउटलेट्स, 30+ कर्मचारी और करीब 2.5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुकी हैं।

बिहार न्यूज
25 लोगों के परिवार से शुरू हुआ खाना बनाने का सफर
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
7 मिनट

Patna News: कभी 20 रुपये की थाली से शुरू हुआ एक छोटा-सा होम किचन आज करोड़ों के कारोबार में बदल चुका है। पटना की देवनी देवी की कहानी मेहनत, आत्मनिर्भरता और हौसले की मिसाल है। 65 साल की उम्र में उन्होंने न केवल अपना फूड ब्रांड खड़ा किया, बल्कि 30 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया। आज उनके ‘अम्मा किचन’ के दो डाइन-इन आउटलेट्स हैं और बिजनेस का सालाना टर्नओवर करीब 2.5 करोड़ रुपये बताया जाता है।


25 लोगों के परिवार से शुरू हुआ खाना बनाने का सफर

देवनी देवी का ज्यादातर जीवन एक गृहिणी के तौर पर बीता। महज 16 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई और बिहार के करीब 25 सदस्यों वाले संयुक्त परिवार का वो हिस्सा बन गईं। इतने बड़े परिवार के लिए रोजाना खाना बनाना, खाने की योजना तैयार करना और हर सदस्य की जरूरत के मुताबिक भोजन तैयार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। सुबह और शाम वो परिवार के दो दर्जन से ज्यादा सदस्यों का खाना अकेले बनाती थी। देवनी देवी के पास कोई बिजनेस की डिग्री नहीं थी और ना ही किसी तरह की ट्रेनिंग उन्होंने ली थी। सालों भर एक बड़े संयुक्त परिवार के लिए खाना बनाते-बनाते उन्होंने बड़ी मात्रा में स्वादिष्ट भोजन तैयार करने का हुनर सीख लिया और वही हुनर आगे चलकर काम आया। जो उनके कारोबार की सबसे बड़ी ताकत बना।


2002 में पटना आईं और दिखी एक नई संभावना

साल 2002 में बच्चों की पढ़ाई के सिलसिले में देवनी देवी पटना आई थी, तो गांव को छोड़कर वो राजधानी में ही शिफ्ट हो गयी। यहीं एक दिन उनकी नजर एक मेडिकल स्टूडेंट के टिफिन पर पड़ी। खाना देखकर उन्हें महसूस हुआ कि घर से दूर रहने वाले छात्रों को किफायती और घर जैसा स्वाद देने वाले भोजन की जरूरत है। देवनी देवी ने इसी जरूरत को अपना अवसर बनाया और छात्रों के लिए खाना बनाकर बेचने का फैसला किया।


20 रुपये की थाली से हुई शुरुआत

देवनी देवी ने महज 20 रुपये प्रति थाली की कीमत पर घर जैसा सादा खाना उपलब्ध कराना शुरू किया। उनका पहला ग्राहक सौरभ नाम का एक मेडिकल स्टूडेंट था। उसी ने उन्हें टिफिन और मेस सर्विस की जरूरतों को समझने में मदद की। शुरुआत में खाना बनाने से लेकर पैकिंग और डिलीवरी तक का पूरा काम देवनी देवी खुद संभालती थीं। ग्राहकों तक खाना पहुंचाने के लिए उन्हें कई बार लंबी दूरी भी तय करनी पड़ती थी।


धीरे-धीरे उनके खाने की चर्चा छात्रों के बीच फैलने लगी। बिना किसी बड़े विज्ञापन के ग्राहकों के माध्यम से ही कस्टमर बढ़ते चले गए। उनके खाने की तारीफ सुनकर कई लोग उनसे खाना पैंक कराने लगे। देवनी देवी को छात्र प्यार से ‘अम्मा’ कहने लगे और इसी नाम से उनके कारोबार की पहचान बनी। 


आलोचनाओं के बावजूद नहीं मानी हार

घर से बाहर निकलकर काम करने के उनके फैसले पर आसपास के लोगों ने सवाल भी उठाए। परिवार और समाज की आलोचनाओं के बावजूद देवनी देवी ने अपना काम जारी रखा। यहां तक कि उनके पति ने करीब छह महीने तक उनसे बातचीत नहीं की। लेकिन आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने का उनका संकल्प कमजोर नहीं पड़ा।


80 हजार रुपये बचाकर खरीदे 8 रिक्शा

कमाई बढ़ने लगी तो देवनी देवी ने पैसे खर्च करने के बजाय भविष्य के लिए बचत करना शुरू किया। उन्होंने करीब 80 हजार रुपये बचाकर 8 रिक्शे खरीदे, जिससे उनके पास आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया तैयार हो गया। इसके बाद साल 2009 में उन्होंने अपनी पोती के नाम पर ‘समृद्धि गर्ल्स हॉस्टल’ शुरू किया। खास बात यह रही कि उनके टिफिन सर्विस से जुड़े पुराने छात्र ही हॉस्टल के शुरुआती निवासियों में शामिल हुए।


कोविड में बंद होने की बजाय जारी रखा खाना पहुंचाना

कोरोना महामारी का दौर उनके कारोबार के लिए भी मुश्किल साबित हुआ। छात्र अपने घर लौट गए और हॉस्टल बंद हो गए। इससे टिफिन और हॉस्टल से जुड़ा उनका कारोबार लगभग ठप हो गया। हालांकि, देवनी देवी ने ऐसे मुश्किल समय में भी खाना बनाना बंद नहीं किया। उन्होंने डॉक्टरों के हॉस्टल में खाना पहुंचाना शुरू किया, जहां स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित और भरोसेमंद भोजन की जरूरत थी। इसी दौरान देवनी देवी खुद भी कोविड से संक्रमित हो गईं। तब उनके उन छात्रों ने उनकी मदद की, जिन्हें उन्होंने वर्षों तक खाना खिलाया था। बताया जाता है कि छात्रों ने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) में उनकी देखभाल की।


2022 में ‘अम्मा किचन’ ने लिया डिजिटल अवतार

देवनी देवी के कारोबार में सबसे बड़ा बदलाव साल 2022 में आया। उनके बेटे ने बिजनेस को ऑनलाइन ले जाने का सुझाव दिया। इसके बाद ‘अम्मा किचन’ को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया गया। ऑनलाइन आने के बाद उनके कारोबार को नए ग्राहक मिलने लगे और ऑर्डर्स तेजी से बढ़ने लगे। धीरे-धीरे बिजनेस का विस्तार हुआ और डाइन-इन आउटलेट्स भी शुरू किए गए। आज ‘अम्मा किचन’ के आउटलेट्स पर थाली की कीमत करीब 100 से 300 रुपये के बीच है।


20 रुपये की थाली से 2.5 करोड़ रुपये के कारोबार तक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज पटना में ‘अम्मा किचन’ के दो डाइन-इन आउटलेट्स हैं और यहां 30 से ज्यादा लोग काम करते हैं। बिजनेस का सालाना टर्नओवर करीब 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बताया जाता है कि रोजाना करीब 350 ऑनलाइन ऑर्डर्स मिलते हैं। यानी जिस काम की शुरुआत एक छोटे से होम किचन में 20 रुपये की थाली से हुई थी, वह आज एक स्थापित फूड ब्रांड का रूप ले चुका है। शुरुआत में उनके काम को लेकर संदेह जताने वाले बड़े बेटे जयशंकर ने भी बाद में अपनी नौकरी छोड़ दी और मां के बढ़ते कारोबार को संभालने में जुट गए।


स्वाद और मेहनत को बनाया कारोबार की ताकत

देवनी देवी की कहानी की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने न तो किसी बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की और न ही किसी बड़ी मार्केटिंग रणनीति के साथ अपना कारोबार शुरू किया। उन्होंने अपने वर्षों पुराने हुनर को ही अपनी ताकत बनाया और एक ऐसी समस्या पहचानी, जिसका सामना पटना में रहने वाले छात्रों को करना पड़ रहा था—घर से दूर रहते हुए घर जैसा, स्वादिष्ट और किफायती खाना मिलना। आज 65 वर्षीया देवनी देवी ने अपने इसी हुनर और लगातार मेहनत के दम पर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही जरूरत को पहचानकर, छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी मेहनत और निरंतरता के दम पर बड़े कारोबार में बदला जा सकता है। 

20 रुपये की थाली से 2.5 करोड़ के टर्नओवर तक, पटना की देवनी देवी की सफलता की कहानी 20 रुपये की थाली से 2.5 करोड़ के टर्नओवर तक, पटना की देवनी देवी की सफलता की कहानी 20 रुपये की थाली से 2.5 करोड़ के टर्नओवर तक, पटना की देवनी देवी की सफलता की कहानी