Bihar News: बिहार के किशनगंज में तैनात रहे निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार और लाइन हाजिर किए गए थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की जोड़ी पर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की जांच ने भ्रष्टाचार की ऐसी परतें खोली हैं, जिसने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। जांच में सामने आया है कि दोनों अधिकारियों के बीच महज तीन महीनों में करीब 2000 बार फोन पर बातचीत हुई और इन्हीं कॉल्स के जरिए अवैध वसूली से लेकर पैसे के बंटवारे तक का पूरा ‘खाका’ तैयार होता था।
कॉल डिटेल से खुला बड़ा खेल
ईओयू की जांच में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सबसे बड़ा सबूत बनकर सामने आया है। तीन महीने में 2000 कॉल्स इस बात की ओर इशारा करते हैं कि दोनों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये बातचीत सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि हर स्तर पर अवैध गतिविधियों के संचालन और रकम के हिसाब-किताब से जुड़ी थी।
माफिया से सीधा कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि इस जोड़ी का संबंध कई अवैध नेटवर्क से था। बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और ‘एंट्री’ माफिया से मिलकर यह गिरोह काम करता था। इन माफियाओं को संरक्षण देने के बदले नियमित रूप से मोटी रकम वसूली जाती थी। इस तरह पूरे इलाके में गैरकानूनी धंधों को खुला संरक्षण मिल रहा था।
करोड़ों की अवैध कमाई का शक
ईओयू के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई है। यह पैसा सीधे तौर पर कैश और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद इस रकम को अलग-अलग माध्यमों से निवेश कर सफेद बनाने की कोशिश की जाती थी।
बेनामी संपत्तियों का जाल
जांच एजेंसी को मुजफ्फरपुर के कांटी से लेकर पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग रोड और दिल्ली-एनसीआर तक कई जगहों पर संपत्तियों के सुराग मिले हैं। आशंका है कि ये संपत्तियां बेनामी हैं और इन्हें तीसरे पक्ष के नाम पर खरीदा गया है। फिलहाल इन सभी संपत्तियों के दस्तावेज और भुगतान स्रोत की जांच की जा रही है।
50 करोड़ की संपत्ति पर सवाल
थानेदार अभिषेक कुमार रंजन पर अपने सेवाकाल के दौरान करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। ईओयू जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर पटना स्थित कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाने वाली है। पूछताछ में उनसे संपत्ति और आय के स्रोत को लेकर जवाब मांगा जाएगा।
‘राजदार’ बनकर चला खेल
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अभिषेक रंजन, निलंबित एसडीपीओ गौतम कुमार के बेहद करीबी और ‘राजदार’ थे। दोनों के बीच ऐसा तालमेल था कि इलाके में सक्रिय शराब माफिया, तस्कर और अन्य अवैध गिरोह बिना किसी डर के काम कर रहे थे। बदले में इनसे मिलने वाली रकम को व्यवस्थित तरीके से बांटा जाता था।
आगे और बड़े खुलासे संभव
आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। डिजिटल सबूत, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और कॉल रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।





