Khan Sir Hospital: राजधानी पटना में कोचिंग सेंटर में हुई फायरिंग की घटना के बाद खान सर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब उनके अस्पताल 'खान हेल्थ केयर' को भी अग्निशमन विभाग ने नोटिस जारी किया है। विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।
पटना अग्निशमन विभाग के कमांडेंट रितेश पांडे ने बताया कि अस्पताल की जांच के दौरान फायर सेफ्टी से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। इन्हीं खामियों को देखते हुए अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि "15 दिन में सारी कमियां पूरी नहीं की जाती हैं तो अस्पताल को सील किया जाएगा। 10 दिन बाद दोबारा जांच होगी और नोटिस के माध्यम से पूछा जाएगा कि आखिर आपके अस्पताल को क्यों नहीं सील किया जाए?"
दिल्ली और मुजफ्फरपुर के अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं के बाद बिहार अग्निशमन विभाग अलर्ट मोड में है। संभावित हादसों को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पटना में अस्पतालों और होटलों की व्यापक फायर सेफ्टी जांच शुरू की गई है। अग्निशमन विभाग के डीआईजी मनोज कुमार नट ने बताया कि पिछले दो दिनों में विभाग की टीमों ने पटना के लगभग 60 से 70 अस्पतालों और होटलों का निरीक्षण किया है।
निरीक्षण के दौरान अग्निशमन उपकरणों, इमरजेंसी एग्जिट, सीसीटीवी कैमरों, पानी की उपलब्धता, फायर अलार्म सिस्टम और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की विस्तृत जांच की गई। जांच में पाया गया कि कई संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। कुछ जगहों पर अग्निशमन यंत्र अनुपयोगी मिले, जबकि कई संस्थानों में आपातकालीन निकास व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी।
डीआईजी मनोज कुमार नट ने कहा कि जांच के दौरान पांच ऐसे अस्पताल चिह्नित किए गए हैं, जहां गंभीर स्तर की सुरक्षा खामियां पाई गईं। किसी भी आपात स्थिति में यहां मरीजों और अन्य लोगों की जान को बड़ा खतरा हो सकता था। इसी आधार पर विभाग ने एडवांस पटना सेंट्रल अस्पताल, आरोग्यवर्धन अस्पताल, पिनेकल अस्पताल, श्याम ट्रस्टेड रिसर्च अस्पताल, अपेक्स अस्पताल के खिलाफ सीलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग संस्थान और खान हेल्थ केयर अस्पताल से जुड़े सवाल पर डीआईजी ने स्पष्ट किया कि फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश पांडे के नेतृत्व में लगातार मॉनिटर की जा रही है।
मनोज कुमार नट ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किसी संस्था को दंडित करना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों और होटलों जैसी जगहों पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं, इसलिए आग लगने जैसी आपात स्थिति में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में सभी संस्थानों के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।



