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देवेश कुमार के इस्तीफे पर रोहिणी आचार्य ने कसा तंज, बोलीं- कोर्ट की फटकार के बाद आनन-फ़ानन में BJP ने 'कुर्बानी का बकरा' ढूँढ निकाला

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बिटिया ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा जी के सुपुत्र को मंत्रिमंडल की मलाईदार सीट पर बरकरार रखने के लिए बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा लेना 'कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ' की नीति का एक नायाब उदाहरण है।

बिहार न्यूज
देवेश कुमार को बली का बकरा बनाया!
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA:विधान परिषद सदस्य की सदस्यता से देवेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया। सभापति को उन्होंने अपने इस्तीफे की कॉपी सौंप दी है। उनके इस्तीफे के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजे जाने की तैयारी तेज हो गई है। एमएलसी पद से इस्तीफा देने वाले बीजेपी नेता देवेश कुमार को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बिटिया रोहिणी आचार्य ने ट्वीट किया है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए निशाना साधा और कहा कि न्यायालय की तल्ख़ टिप्पणी से साख पर बट्टा लगा, तो आनन-फ़ानन में 'कुर्बानी का बकरा' ढूँढ निकाला गया ..


रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट से 'कानूनी फटकार' का प्रसाद मिलते ही भाजपा - एनडीए के बीच जो नैतिकता अचानक जागृत हुई है, वह वाकई काबिले-तारीफ़ है। उपेंद्र कुशवाहा जी के सुपुत्र को मंत्रिमंडल की मलाईदार सीट पर बरकरार रखने के लिए बीजेपी के एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा लेना 'कुर्सी बचाओ, गठबंधन चलाओ' की नीति का एक नायाब उदाहरण है।


दरअसल देवेश कुमार शुक्रवार शाम पीछे के दरवाजे से बिहार विधान परिषद पहुंचे थे, जहां सभापति को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस मौके पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। अब यह कयास लगाया जा रहा है कि देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट से दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाया जाएगा।


मंत्री पद को लेकर था संवैधानिक संकट

दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वह अभी तक विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार किसी भी मंत्री को पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। इसी मुद्दे को लेकर उनके मंत्री पद पर संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई थी। इस संबंध में मामला अदालत तक पहुंचा था और कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा था। इसके बाद सरकार ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी शुरू कर दी।


देवेश कुमार के इस्तीफे से खुला रास्ता

देवेश कुमार की खाली हुई सीट से दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो उनके लिए विधानमंडल की सदस्यता प्राप्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा और मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट भी समाप्त हो जाएगा।


विपक्ष लगातार उठा रहा था सवाल

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की विधानमंडल सदस्यता को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा था। विपक्षी दलों का कहना था कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मंत्री पद पर बने रहने के लिए सदन की सदस्यता आवश्यक है। वहीं, सत्तारूढ़ एनडीए का कहना था कि इस मामले में सभी कदम नियमों के अनुसार उठाए जाएंगे।


एनडीए की रणनीति मानी जा रही तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी एनडीए की रणनीति का हिस्सा है। सरकार में संतुलन बनाए रखने और मंत्रियों की संवैधानिक स्थिति मजबूत करने के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश जल्द ही बिहार विधान परिषद के सदस्य बन सकते हैं।