AURANGABAD: बिहार के औरंगाबाद जिले में रिसियप थाने के एक दारोगा ने मारपीट मामले में एक पीड़ित से दो लाख की रिश्वत मांगी। मांग पूरी नहीं करने पर पोक्सो केस में फंसाने की धमकी दी। मामला एक लाख में दो किश्तों में देना तय हुआ। पीड़ित ने शुक्रवार को जैसे ही तय राशि की पहली किश्त के रूप में 50 हजार कैश दी, वैसे ही दारोगा को निगरानी की टीम ने रंगेहाथ धर दबोच लिया।
निगरानी के हत्थे चढ़े दारोगा की पहचान रिसियप थाना के सब ईंस्पेक्टर उमेश कुमार के रूप में की गई है। गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम रिश्वतखोर दारोगा को अपने साथ प्रदेश की राजधानी पटना स्थित निगरानी थाना ले गई है, जहां शनिवार को दारोगा को निगरानी की विशेष अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया जाएगा। मारपीट मामले में राहत के नाम पर रिश्वत की मांग किये जाने पर निगरानी ने कार्रवाई की। पुलिस उपाधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में यह शिकायत दर्ज कराई थी कि नाली विवाद को लेकर हुई मारपीट मामले में रिसियप थाना का दारोगा उमेश कुमार उनसे दो लाख रुपये बतौर घूस मांग रहा है।
घूस की रकम नहीं देने पर पोक्सो एक्ट केस में फंसाने की धमकी देने लगा। पीड़ित की शिकायत का सत्यापन किया गया, जिसमें आरोप सही पाया गया। जिसके बाद निगरानी की टीम ने पीड़ित से 50 हजार रुपये लेते रंगेहाथ उक्त दारोगा को दबोच लिया। पीड़ित लक्ष्मण राम जब थाने में पैसा लेकर पहुंचा तो दारोगा उसे थाने के पीछे पंचायत सरकार भवन के पास ले गया और वही पर 50 हजार कैश लेने लगा। पहले से वहां मौजूद निगरानी की टीम ने दारोगा उमेश को रंगेहाथ घूस लेते गिरफ्तार कर लिया।
निगरानी की सात सदस्यीय टीम में डीएसपी के अलावा एएसआई रंजन कुमार, सतीश कुमार सिंह, एसआई संजीत कुमार, मो. नसीम अहमद, राहुल कुमार एवं राममोहन राम शामिल रहे। पीड़त ने बताई पूरी कहानी-पीड़ित लक्ष्मण राम ने बताया कि तेंदुआ गणपत गांव में नाली-गली के पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी तनाव में 14 जुलाई को दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। मारपीट में वें घायल हो गए थे।डायल-112 की टीम उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गई थी। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी रिसियप थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान एसआई उमेश कुमार उन पर रिश्वत देने का लगातार दबाव बना रहे थे। कार्रवाई में राहत देने के लिए उन्होने दो लाख की मांग की। बाद में डेढ़ लाख में मामला सलटा देने की बात कहने लगे। मामले की निगरानी में शिकायत करने के बाद उन्होने दारोगा से सौदेबाजी की और दो किश्तों में एक लाख पर मामला तय हुआ। तय राशि की पहली किश्त 50 हजार रुपये देते हुए उन्होने अपने बालों पर हाथ फेरकर निगरानी की टीम को ईशारा किया। ईशारा पाते ही निगरानी की टीम ने रिश्वतखोर दारोगा को दबोंच लिया। पीड़ित ने बताया कि दारोगा ने उन्हे कहा था कि यह रकम उपर इंस्पेक्टर तक पहुंचेगी। सबको मैनेज करना पड़ता है। बहुत कम रकम में मामला सलटाने जा रहे है।





