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बिहार के सरकारी अस्पतालों की खुली पोल: हाजिरी बनाकर स्वास्थ्यकर्मी गायब, दर्द से तड़पती रही गर्भवती, एक बेंच पर दो मरीज

जमुई के बरहट और मलयपुर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही सामने आई है। ड्यूटी पर तैनात ANM के हाजिरी बनाकर गायब रहने, GNM के सोते मिलने और प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती को समय पर इलाज नहीं मिलने के मामले में सिविल सर्जन ने जांच..

बिहार न्यूज
सरकारी अस्पतालों में लापरवाही का खुलासा
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
7 मिनट

JAMUI: बिहार सरकार एक ओर जहां बेहतर स्वास्थ्य सेवा बहाल होने का दावा करती हैं। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जो तस्वीरें सामने आई है, उसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। जो जमीनी हकीकत के दावों की पोल खोल रही है। 


लाखों की आबादी पर निर्भर बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शाम ढलते ही स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की कुर्सियां खाली नजर आती हैं।बुधवार देर रात स्थानीय लोगों की शिकायत पर भास्कर की टीम जब बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो अस्पताल का मुख्य स्लाइडिंग गेट खुला मिला। लेकिन अंदर का नजारा चौंकाने वाला था।


 ड्यूटी रूम के बाहर कुर्सियां तो लगी थीं, लेकिन उन पर बैठने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था। पूरा अस्पताल वीरान दिखाई दे रहा था। इसी दौरान चिकित्सा कक्ष की डोरबेल बजाने पर तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ विवेक कुमार सिंह बाहर आए। जब उनसे ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने स्वयं अस्पताल की लापरवाही उजागर करते हुए बताया कि उनके साथ एएनएम पुतुल कुमारी और  एएनएम बबीता कुमारी की ड्यूटी लगाई गई थी, बबीता कुमारी पिछले कई दिनों से अस्पताल नहीं आ रही है।लेकिन पुतुल कुमारी रात्रि डिप्टी रहने के बावजूद केवल हाजिरी बनाकर अस्पताल से चली गईं।


दर्द से कराहती रही गर्भवती, ड्यूटी रूम में सोती मिली जीएनएम


स्वास्थ्य व्यवस्था की दूसरी शर्मनाक तस्वीर उप-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मलयपुर से सामने आई। बुधवार देर रात बरहट के फुलवरिया निवासी बादल कुमार अपनी गर्भवती पत्नी ज्योति कुमारी को प्रसव के लिए आशा कार्यकर्ता खुशबू कुमारी के साथ अस्पताल लेकर पहुंचे। प्राथमिक जांच के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने दो घंटे बाद प्रसव होने की बात कह दी।लेकिन महिला को प्रसव कक्ष में भर्ती करने या बेड उपलब्ध कराने के बजाय बाहर टहलने की सलाह देकर छोड़ दिया गया। दर्द से कराहती गर्भवती महिला अपने परिजनों के साथ अस्पताल के एक टेबल पर बैठकर समय बिताने को मजबूर रही।


सबसे गंभीर बात यह रही कि ड्यूटी पर तैनात जीएनएम संध्या कुमारी और एएनएम सविता कुमारी अपने कमरे में सोती मिलीं। आशा कार्यकर्ता द्वारा कई बार बुलाने के बावजूद वे बाहर नहीं आईं करीब 15 मिनट के कमरे के अंदर से ही निर्देश देती रहीं। करीब 20 मिनट बाद बाहर निकलकर उन्होंने सफाई दी कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड नहीं रहने के कारण वे असहज महसूस करती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को चिकित्सकीय निगरानी की सबसे अधिक जरूरत थी, तब ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों का सो जाना और यह कहना कि मैं अस्पताल में आशाए महसूस करती हूं क्या उनकी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना नहीं है?


महिला होने का मिल रहा संरक्षण

सूत्रों के अनुसार बरहट और मलयपुर अस्पताल में तैनात कुछ महिला स्वास्थ्यकर्मी लंबे समय से ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतती रही हैं। आरोप है कि महिला कर्मचारी होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बचते हैं। यही वजह है कि हाजिरी बनाकर ड्यूटी से गायब रहने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। बताया जाता है कि मलयपुर अस्पताल में तैनात कुछ जीएनएम लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं, जिससे जवाबदेही भी कमजोर हो गई है।


पहले भी सामने आ चुकी है मलयपुर अस्पताल की लापरवाही


यह पहली बार नहीं है जब बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था सामने आई हो। जुलाई महीने में भी मलयपुर गांव के विजय सागर मुसहरी के दो महिला को एक ही ब्रांच पर लेट कर सलाइन चढ़ाते जीएनएम संध्या कुमारी नजर आई, ताजू की बात थी कि मालीपुर अस्पताल की एक और पूरा बेड खाली उसके बावजूद संध्या कुमारी के द्वारा एक ब्रांच पर ही लेट कर एक साथ फ्लाइंग चढ़ाया जा रहा था पीड़ित महिला की पहचान मलयपुर विजय सागर मुसहरी के जिलो मांझी की पत्नी बसंती देवी के रूप में किया गया दूसरी महिला भजो मांझी की पत्नी बताई जाती है  तो वही 26 तारीख को मलयपुर थाना क्षेत्र के फुलवरिया मोड़ पर दो युवकों के बीच मारपीट में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलने पर बरहट थाना के एएसआई मनोज कुमार यादव घायल को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां ड्यूटी पर कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला। मजबूरन घायल को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में हाजिरी बनाकर ड्यूटी से गायब रहने का खेल लंबे समय से जारी है। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और गरीब परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।


सिविल सर्जन ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश

मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि सरकार गर्भवती महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में हाजिरी बनाकर ड्यूटी से गायब रहने वाली एएनएम और ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने अथवा सोती पाई गई जीएनएम के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर मरीजों के इलाज में लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता