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सरकारी दफ्तर में ड्यूटी के दौरान ‘आराम फरमाते’ दिखे कर्मचारी, वीडियो हो गया वायरल

जमुई के बरहट प्रखंड कार्यालय में प्रधान लिपिक का ड्यूटी के दौरान कुर्सी पर सोते हुए वीडियो वायरल हो रहा है। मामला सामने आने के बाद सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।

बिहार न्यूज
फरियादी इंतजार करते रहे और कर्मचारी सोते रहे
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

JAMUI:बिहार में सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, इस बार जमुई जिले के बरहट प्रखंड कार्यालय से एक तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो बुधवार 20 मई की दोपहर करीब 1:06 बजे की है जब प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रधान लिपिक राजेंद्र पासवान कुर्सी पर आराम फरमाते नजर आए। यह तस्वीर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और फरियादियों में नाराजगी देखी जा रही है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बरहट प्रखंड कार्यालय में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण विभिन्न सरकारी योजनाओं, प्रमाण पत्रों, पेंशन, राशन कार्ड और अन्य जरूरी कार्यों को लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि जिम्मेदार कर्मचारी कार्यालय समय में आराम करते और नींद लेते दिखाई देंगे तो आम लोगों की नाराजगी सामने आएगी ही। लोगों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण अक्सर आम नागरिकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। यहां कोई काम समय पर नहीं होता है। कर्मचारियों की इसी लापरवाही के चलते प्रमाण पत्रों के लिए रोज दौड़ना पड़ता है।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तस्वीर सामने आने के समय भी कई लोग अपने कार्यों को लेकर कार्यालय में मौजूद थे। लोगों का आरोप है कि संबंधित प्रधान लिपिक का यह व्यवहार नया नहीं है। कई ग्रामीणों ने कहा कि वे अक्सर कार्यालय पहुंचने के बाद लंबे समय तक निष्क्रिय रहते हैं, जिससे कामकाज प्रभावित होता है और लोगों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।


हालांकि, मामले को लेकर प्रधान लिपिक राजेंद्र पासवान ने अपनी सफाई भी दी है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती और स्वास्थ्य कारणों से वे कुछ देर आराम कर रहे थे। वहीं, बरहट बीडीओ श्रवण कुमार पांडेय ने भी बताया कि प्रधान लिपिक पूर्व में लकवा की बीमारी से पीड़ित रह चुके हैं और उनकी शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं रहती। 


बीडीओ ने कहा कि गर्मी और स्वास्थ्य कारणों से संभव है कि वे कुछ देर के लिए नींद में चले गए हों। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। यह घटना केवल एक कर्मचारी की कार्यशैली तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, जवाबदेही और कार्य संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 


ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में समयबद्ध और जिम्मेदार कार्य संस्कृति विकसित नहीं हुई, तो सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना मुश्किल होगा। अब लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई है।

जमुई से धीरज कुमार सिंह

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Dhiraj Kumar Singh

FirstBihar संवाददाता