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Bihar Toll Tax : 'फ्री की रेबड़ी कब तक मिलेगी...', मंत्री ई.शैलेंद्र ने आखिर क्यों दिया ऐसा जवाब

अब बिहार में स्टेट हाईवे पर भी लगेगा टोल टैक्स! मंत्री के 'फ्री की रेबड़ी' वाले बयान ने छेड़ी नई सियासी बहस। आखिर क्यों लिया गया यह फैसला? जानिए पूरी कहानी।

Bihar Toll Tax :  'फ्री की रेबड़ी कब तक मिलेगी...', मंत्री ई.शैलेंद्र ने आखिर क्यों दिया ऐसा जवाब
Tejpratap
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Bihar Toll Tax : बिहार सरकार ने हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए यह तय किया है कि अब सिर्फ केंद्र सरकार की ओर से निर्मित राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए स्टेट हाईवे पर भी टोल टैक्स वसूला जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सड़कों के रखरखाव और बेहतर रख-रखाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा सकेंगे। इसी फैसले को लेकर शनिवार को पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने अपनी प्रतिक्रिया दी।


स्टेट हाईवे पर टोल वसूली के फैसले को लेकर जब पत्रकारों ने पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र से सवाल किया तो उन्होंने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह एक अच्छा निर्णय है। उन्होंने कहा, "हां, अच्छा निर्णय है, क्योंकि फ्री की रेबड़ी कब तक बांटते रहेंगे। हम लोग रोड का अच्छा मेंटेनेंस देंगे। पब्लिक भी चाहती है कि सड़क जो बनती है, वह मेंटेन रहे, उस पर हम अच्छे तरह से चलें, एक्सीडेंट ना हो। तो कुछ तो हम लोग जब तक नहीं लेंगे, तब तक कैसे मेंटेन कर पाएंगे? आखिर पैसा कहां से आएगा।"


मंत्री ने आगे कहा, "पब्लिक समझती है। वह लालू यादव वाली पब्लिक नहीं है, राबड़ी वाली और तेजस्वी वाली पब्लिक नहीं है। बहुत ही समझदार बिहार की जनता है। तभी तो इतना बड़ा बहुमत दिया है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टेट हाईवे पर टोल वसूली को लेकर सरकार की नीति तय हो चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने इस व्यवस्था की शुरुआत की तुलना ट्रेन के चलने से करते हुए कहा, "स्टेट हाईवे पर टोल वसूली को लेकर पॉलिसी निर्धारित हो गई है। थोड़ा-बहुत आप लोग देखते होंगे, जब ट्रेन अपने स्टेशन से चलती है तो शुरुआत में थोड़ी करकराहट होती है। तो थोड़ी करकराहट होगी, लेकिन फिर स्मूथ चलेगा।"


दरअसल, राज्य सरकार का मानना है कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। बड़ी संख्या में स्टेट हाईवे का निर्माण और चौड़ीकरण किया गया है। ऐसे में इन सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने, समय-समय पर मरम्मत कराने, सुरक्षा सुविधाओं को बेहतर करने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए नियमित वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी। सरकार का तर्क है कि टोल वसूली से मिलने वाली राशि का उपयोग इन्हीं कार्यों में किया जाएगा।


हालांकि, सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होने की संभावना है। विपक्ष पहले ही आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सरकार का दावा है कि बेहतर सड़क सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम आवश्यक है।


अब राज्य सरकार की ओर से टोल वसूली की विस्तृत कार्ययोजना और किन-किन स्टेट हाईवे पर पहले चरण में टोल लागू होगा, इसकी अधिसूचना जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस नीति के लागू होने के बाद राज्य की सड़क व्यवस्था और टोल प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।