UPSC Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। इस परीक्षा में कामयाबी के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन, धैर्य और संघर्ष छिपा होता है। राजस्थान के जयपुर की रहने वाली नेहा ब्याडवाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद हार नहीं मानी और चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 569 हासिल कर अपने सपने को साकार कर दिखाया।
तीन बार फेल होने के बाद भी नहीं टूटा हौसला
नेहा ब्याडवाल का सपना शुरू से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर देश और समाज की सेवा करना था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने पूरी लगन के साथ UPSC की तैयारी शुरू की। हालांकि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और बेहतर बनाया, लेकिन दूसरे और तीसरे प्रयास में भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। लगातार तीन बार असफल होने के बावजूद नेहा ने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया। उन्होंने उत्तर लेखन (Answer Writing) में सुधार किया, अपनी रणनीति बदली और पूरी एकाग्रता के साथ चौथे प्रयास की तैयारी शुरू कर दी।
चौथे प्रयास में हासिल की AIR 569
नेहा की मेहनत आखिरकार रंग लाई। वर्ष 2021 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने कुल 960 अंक प्राप्त किए और ऑल इंडिया रैंक 569 हासिल कर सफलता का परचम लहरा दिया। महज 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल कर हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।
1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स होने के बावजूद छोड़ दिया सोशल मीडिया
नेहा ब्याडवाल की सफलता की सबसे खास बात उनका अनुशासन और आत्मनियंत्रण रहा। तैयारी के दौरान वह सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय थीं और इंस्टाग्राम समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर उनके एक लाख से अधिक फॉलोअर्स थे।लेकिन उन्हें जल्द ही एहसास हुआ कि सोशल मीडिया उनकी पढ़ाई और एकाग्रता में बाधा बन रहा है। इसके बाद उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए लगभग तीन वर्षों तक सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। नेहा का मानना है कि इस "डिजिटल डिटॉक्स" की वजह से उन्हें पढ़ाई, रिवीजन और मॉक टेस्ट के लिए अधिक समय मिला, जिसने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पढ़ाई में भी रहीं अव्वल
नेहा ब्याडवाल का जन्म 3 जुलाई 1999 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था। हालांकि उनका बचपन छत्तीसगढ़ के रायपुर में बीता, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के डीबी गर्ल्स कॉलेज से स्नातक किया और कॉलेज के दौरान यूनिवर्सिटी टॉपर भी रहीं।
पिता ने हर कदम पर बढ़ाया हौसला
नेहा के पिता श्रवण कुमार आयकर विभाग में अधिकारी हैं। उन्होंने बचपन से ही बेटी के भीतर देश सेवा की भावना विकसित की। UPSC की तैयारी के दौरान जब नेहा लगातार तीन बार असफल हुईं, तब उनके पिता ने उनका मनोबल टूटने नहीं दिया और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।
युवाओं के लिए दिया खास संदेश
नेहा ब्याडवाल का कहना है कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में केवल किताबें पढ़ना ही काफी नहीं होता। सफलता के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना, सही रणनीति अपनाना और ध्यान भटकाने वाली चीजों, खासकर सोशल मीडिया, से दूरी बनाना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि हर असफलता एक नई सीख लेकर आती है। यदि उम्मीदवार अपनी गलतियों से सीखकर लगातार मेहनत करता रहे, तो सफलता देर-सवेर जरूर मिलती है।
जयपुर की नेहा ब्याडवाल ने लगातार तीन बार UPSC में असफल होने के बाद चौथे प्रयास में AIR 569 हासिल की। 1 लाख से अधिक सोशल मीडिया फॉलोअर्स होने के बावजूद उन्होंने 3 साल तक डिजिटल डिटॉक्स अपनाया (डिजिटल डिटॉक्स का मतलब जानबूझकर कुछ समय के लिए स्मार्टफोन, कंप्यूटर, और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना होता है ) नेहा ने कड़ी मेहनत की बदौलत सफलता हासिल की।





