BIHAR NEWS : बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए चार सांसद आज संसद भवन में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। उन्हें देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शपथ दिलाएंगे। इन चार नेताओं में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा, समाजवादी नेता जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर और भाजपा नेता जीवेश कुमार शामिल हैं। इससे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को ही राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले चुके हैं।
जानकारी के अनुसार सभी नवनिर्वाचित सांसद शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस बार राज्यसभा में बिहार से कई नए चेहरे देखने को मिलेंगे, वहीं कुछ नेताओं की वापसी भी हुई है। खास बात यह है कि नितिन नवीन और नीतीश कुमार दोनों ही पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं, जिससे इस चुनाव को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे पहले बिहार विधानसभा के बांकीपुर सीट से विधायक रहे और राज्य सरकार में पथ निर्माण विभाग के मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए भाजपा ने उन्हें पहले राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया और बाद में पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं उन्हें इस पद के लिए प्रोत्साहित किया था।
दूसरी ओर, उपेंद्र कुशवाहा को लगातार दूसरी बार राज्यसभा जाने का अवसर मिला है। वे लंबे समय से बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं और पिछड़े वर्ग की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। वहीं रामनाथ ठाकुर को भी दूसरी बार राज्यसभा भेजा गया है। इससे पहले वे जनता दल (यू) के कोटे से राज्यसभा सदस्य बने थे और इस बार भी उन्हें निरंतरता दी गई है।
भाजपा नेता जीवेश कुमार का यह पहला राज्यसभा कार्यकाल होगा। उनकी जीत को पार्टी के भीतर नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस चुनाव के जरिए भाजपा ने संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है।
इस बीच, जनता दल (यू) ने अपने कोटे से राज्यसभा के उपसभापति और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार मौका नहीं दिया। उनकी जगह नीतीश कुमार को उम्मीदवार बनाया गया, जिन्होंने चुनाव जीतकर राज्यसभा में प्रवेश किया। हालांकि बाद में हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया गया।
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव हुए थे, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हुआ। इन पांचों सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने कब्जा जमाया। महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान कांग्रेस के दो और राजद के एक विधायक के वोटिंग में अनुपस्थित रहने का सीधा फायदा एनडीए को मिला, जिससे उसकी जीत आसान हो गई।
राज्यसभा संसद का उच्च सदन है, जहां सदस्यों का कार्यकाल छह वर्षों का होता है। हर दो साल पर एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं, जिसके कारण चुनाव नियमित अंतराल पर होते रहते हैं। बिहार में इस बार पांच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव आयोजित किए गए थे।
इस चुनाव ने बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव भी दर्ज किया है। लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देकर सत्ता की कमान भाजपा को सौंप दी। इसके बाद सम्राट चौधरी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बनाया गया। यह बदलाव राज्य की राजनीतिक दिशा और गठबंधन समीकरणों में बड़े परिवर्तन का संकेत देता है।
कुल मिलाकर, बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए इन नेताओं का शपथ ग्रहण न केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, बल्कि यह राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों का प्रतीक भी है। आने वाले समय में इन नेताओं की भूमिका संसद में महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।






