ब्रेकिंग
नालंदा में एडवोकेट के बेटे की हत्या से सनसनी, सिर कुचलकर नहर में फेंका शव; प्रेमिका के परिजनों पर आरोपसांसद दिनेश चंद्र यादव के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट, साइबर थाना में FIR दर्जबाढ़ से त्राहिमाम के बीच PM मोदी का जन्मदिन मनाने पर विपक्ष हमलावर, RJD ने सरकार को घेरा; सरकारी खर्च पर उठाए सवालपोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर शव के साथ ये कैसा सलूक? चादर पकड़कर 20 मीटर तक घसीटता रहा शख्स, VIDEO वायरलमुजफ्फरपुर में 100 से ज्यादा जीविका दीदियों से ठगी का मामला गरमाया, कोर्ट ने बैंक से मांगे लोन के कागजात; DPM से जवाब तलबनालंदा में एडवोकेट के बेटे की हत्या से सनसनी, सिर कुचलकर नहर में फेंका शव; प्रेमिका के परिजनों पर आरोपसांसद दिनेश चंद्र यादव के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट, साइबर थाना में FIR दर्जबाढ़ से त्राहिमाम के बीच PM मोदी का जन्मदिन मनाने पर विपक्ष हमलावर, RJD ने सरकार को घेरा; सरकारी खर्च पर उठाए सवालपोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर शव के साथ ये कैसा सलूक? चादर पकड़कर 20 मीटर तक घसीटता रहा शख्स, VIDEO वायरलमुजफ्फरपुर में 100 से ज्यादा जीविका दीदियों से ठगी का मामला गरमाया, कोर्ट ने बैंक से मांगे लोन के कागजात; DPM से जवाब तलब

Bihar Panchayat Election : बिहार पंचायत चुनाव 2026 से पहले बड़ा अपडेट! EBC आरक्षण पर आयोग करेगा फैसला, बदल जाएगा गांवों का चुनावी गणित; मंत्री ने दिया पूरा अपडेट

बिहार पंचायत चुनाव 2026 से पहले आरक्षण और परिसीमन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। EBC के पिछड़ेपन का आकलन समर्पित आयोग करेगा। रिपोर्ट के बाद पंचायतों में आरक्षित और सामान्य सीटों की तस्वीर साफ होगी।

Bihar Panchayat Election
Bihar Panchayat Election
© reporter
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

Bihar Panchayat Election : बिहार में पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होती दिख रही हैं। चुनाव से पहले आरक्षण और परिसीमन को लेकर गांव से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने पंचायत चुनाव में आरक्षण और डेडीकेटेड कमीशन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के लिए किसी नए फार्मूले की बात नहीं हो रही है। आरक्षण निर्धारण के लिए डेडीकेटेड कमीशन का गठन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होने वाली सामान्य प्रक्रिया है।

EBC आरक्षण का फैसला करेगा अति-पिछड़ा वर्ग आयोग

पंचायती राज मंत्री के मुताबिक, बिहार में अति-पिछड़ा वर्ग (EBC) के पिछड़ेपन का आकलन अब अति-पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा। आयोग इसके लिए जरूरी आंकड़े जुटाकर सरकार को अपनी अनुशंसा देगा। इसके आधार पर पंचायत चुनाव में EBC के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि अति-पिछड़ा वर्ग आयोग को समर्पित आयोग (Dedicated Commission) घोषित कर दिया गया है। यह आयोग EBC से संबंधित इंपीरिकल यानी तथ्यात्मक आंकड़े तैयार करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

दरअसल, पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें संबंधित पिछड़े वर्ग की स्थिति का आंकड़ों के आधार पर आकलन किया जाता है। आयोग की रिपोर्ट के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि पंचायत चुनाव में EBC के लिए कौन-कौन सी सीटें आरक्षित होंगी।

पंचायतों में EBC को 20 प्रतिशत आरक्षण

बिहार की त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था में कुल 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। इसमें अति-पिछड़ा वर्ग यानी EBC के लिए 20 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्धारित है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया का सीधा असर हजारों पंचायत पदों के चुनाव पर पड़ सकता है।

आयोग सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ पंचायत स्तर पर EBC के प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करेगा। इसी आधार पर सरकार को रिपोर्ट और अनुशंसा दी जाएगी। इसके बाद आरक्षित और सामान्य सीटों की तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

परिसीमन से बदल सकता है गांवों का पूरा चुनावी गणित

पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन भी ग्रामीण बिहार में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रखंड मुख्यालयों से लेकर गांव की चाय चौपालों तक लोग अपने-अपने गांव और पंचायत के भविष्य को लेकर कयास लगा रहे हैं। कहीं चर्चा है कि कौन-सा गांव दूसरी पंचायत में शामिल हो सकता है, तो कहीं नई ग्राम पंचायत बनने की संभावना को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। अगर परिसीमन के कारण पंचायतों की सीमाओं में बदलाव होता है तो इसका असर पुराने राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

कई ऐसे गांव, जो वर्षों से किसी पंचायत का हिस्सा रहे हैं, नई व्यवस्था में दूसरी पंचायत में जा सकते हैं। वहीं आबादी और क्षेत्रफल के मानकों के आधार पर नई पंचायतों या निर्वाचन क्षेत्रों की तस्वीर भी सामने आ सकती है। इससे पुराने दावेदारों के समीकरण बदल सकते हैं और कई नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान खुल सकता है।

7 हजार की आबादी पर मुखिया-सरपंच का क्षेत्र?

प्रशासनिक स्तर पर चल रही चर्चाओं और निर्धारित मानकों के आधार पर परिसीमन में आबादी के अनुपात को अहम आधार माना जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत औसतन 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत का क्षेत्र निर्धारित किए जाने की चर्चा है। इसी क्षेत्र के लिए मुखिया का चुनाव होगा, जबकि संबंधित ग्राम कचहरी में सरपंच का निर्वाचन होगा। इसी तरह करीब 5 हजार की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य (BDC) का निर्वाचन क्षेत्र बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं लगभग 50 हजार की आबादी पर एक जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित किया जा सकता है।

हालांकि इन आंकड़ों को अंतिम व्यवस्था मानने से पहले आधिकारिक परिसीमन और सरकार की अधिसूचना का इंतजार करना होगा। वार्ड सदस्य और पंच के क्षेत्रों का निर्धारण स्थानीय आबादी, भौगोलिक स्थिति और क्षेत्र की अनुकूलता के आधार पर किया जाएगा।

किसके लिए खुलेगा चुनावी मैदान?

पंचायत चुनाव 2026 से पहले आरक्षण और परिसीमन दोनों ही गांवों की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। किसी सीट के आरक्षित होने या सामान्य रहने से संभावित उम्मीदवारों की पूरी रणनीति बदल सकती है। वहीं पंचायत की सीमा बदलने पर कई गांवों के मतदाता और उम्मीदवार नए राजनीतिक समीकरण में आ सकते हैं।

फिलहाल EBC आरक्षण के लिए समर्पित आयोग की प्रक्रिया और परिसीमन दोनों पर नजर बनी हुई है। आयोग के आंकड़े और सरकार की आगे की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस पंचायत में कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी। इसके बाद ही पंचायत चुनाव 2026 का वास्तविक चुनावी नक्शा सामने आएगा।