PMAY Gramin Bihar : बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत पक्का घर बनाने का सपना देख रहे भूमिहीन परिवारों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने ऐसे पात्र लाभुकों को आवास निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने का फैसला लिया है। इसके लिए अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों से कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र भूमिहीन लाभुकों को 15 से 30 दिनों के भीतर घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन के अभाव में किसी पात्र परिवार का आवास योजना का लाभ न रुके।
करीब 11 हजार भूमिहीन परिवारों को जमीन देने की तैयारी
सरकार के सामने फिलहाल करीब 11 हजार भूमिहीन पात्र लाभुकों को जमीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इन परिवारों के लिए जमीन चिह्नित करने और उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को फेज वाइज कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समय में काम पूरा करने को कहा गया है। इससे उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें आवास योजना के तहत घर बनाने की मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन अपनी जमीन नहीं होने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
सरकारी जमीन नहीं मिली तो सरकार देगी 1 लाख रुपये
इस पूरी व्यवस्था में सबसे अहम बात यह है कि अगर किसी पात्र भूमिहीन लाभुक के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था करेगी। नियम के तहत ऐसे लाभुकों को जमीन खरीदने के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यानी पात्र परिवारों के लिए जमीन की कमी आवास निर्माण में स्थायी बाधा नहीं बनेगी। सरकार की कोशिश है कि पहले उपलब्ध सरकारी जमीन का इस्तेमाल कर पात्र परिवारों को जमीन दी जाए। जहां यह संभव नहीं होगा, वहां जमीन खरीदने के लिए निर्धारित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
2016 से अब तक करीब 43 लाख घर पूरे
बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराया गया है। ग्रामीण विकास मंत्री के अनुसार, 2016 से अब तक बिहार को करीब 49 लाख 16 हजार आवासों का लक्ष्य मिला है।इनमें से लगभग 43 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं करीब 6 लाख आवास अभी निर्माण की प्रक्रिया में हैं और इन्हें भी जल्द पूरा कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का फोकस अब उन लाभुकों तक पहुंचने पर भी है, जिनके सामने आवास निर्माण शुरू करने के लिए जमीन की समस्या बनी हुई है।
सर्वे में सामने आया बड़ा अंतर
आवास योजना से जुड़े सर्वेक्षण में बड़ी संख्या में परिवारों के नाम सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक, सर्वे में 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार से अधिक नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, जांच और पात्रता के आधार पर वास्तविक पात्र लाभुकों की संख्या करीब 62 से 63 लाख बताई जा रही है। नामों और पात्र लाभुकों की संख्या में इतने बड़े अंतर को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इस मामले में अधिकारियों को जांच करने और पात्रता की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जा सके और अपात्र लोगों के नाम हटाए जा सकें।
2026-27 में 11.18 लाख नए घर बनाने का लक्ष्य
आने वाले वित्तीय वर्ष में भी बिहार में ग्रामीण आवास निर्माण को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। 2026-27 के लिए बिहार को 11 लाख 18 हजार 937 नए आवासों का लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लाभुकों की पहचान, जमीन की उपलब्धता और निर्माण कार्य की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। खासकर भूमिहीन परिवारों के मामले में जमीन उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसके साथ ही वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
जमीन की वजह से नहीं रुकेगा गरीब परिवारों का घर
सरकार की नई पहल का सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है, जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। पात्रता पूरी होने के बाद भी जमीन के अभाव में वर्षों तक आवास का इंतजार करने वाले परिवारों के लिए अब जमीन उपलब्ध कराने या 1 लाख रुपये की सहायता से जमीन खरीदने का विकल्प रहेगा।
आने वाले दिनों में अधिकारियों द्वारा भूमिहीन लाभुकों की सूची, उपलब्ध सरकारी जमीन और जमीन खरीदने की जरूरत वाले परिवारों को चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि तय समय सीमा में प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को अपने पक्के घर का सपना पूरा करने का रास्ता मिल सकता है।





