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Bihar News: सड़क हादसे में रोज मर रहे 21 लोग, बिहार के इस जिले में सबसे अधिक मौत

Bihar News: बिहार में हर दिन 27 सड़क हादसों में 21 लोगों की हो रही मौत। पटना, पूर्णिया, गया, मधेपुरा जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित। नेशनल हाईवे बने ‘हेललाइन’, 2024 में रोज 25 मौतें। सड़क संरचना और लापरवाही बड़ा कारण।

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार में सड़कों का विकास जितनी तेजी से हो रहा है, उतनी ही तेजी से सड़क हादसों की भयावहता भी बढ़ रही है। हर दिन औसतन 27 हादसों में 21 लोग अपनी जान गंवा दे रहे हैं। पिछले आठ वर्षों में लगभग 80,000 सड़क दुर्घटनाओं और 60,000 से अधिक मौतों ने सड़कों को नर्क का द्वार बना दिया है। नेशनल हाईवे सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं, जहां 45% हादसे हो रहे हैं। NH-31, NH-28, NH-30 और NH-57 जैसे राजमार्ग अब हादसों का पर्याय बन चुके हैं। रजौली से किशनगंज, गोपालगंज से पटना तक, हर सड़क पर ट्रक और बाइक की टक्कर में जिंदगियां रौंदी जा रही हैं।


2024 में यह कहर और बढ़ गया था, जहां रोजाना 32 हादसे और 25 मौतें दर्ज हुईं, यानी हर घंटे एक जान जा रही है। पटना, पूर्णिया, मधेपुरा, किशनगंज, सहरसा, अररिया, रोहतास और गया जैसे जिले हादसों के केंद्र बन गए हैं। उदाहरण के लिए 1 जुलाई 2024 को रोहतास के चंडी गांव में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने कार को टक्कर मारी, जिसमें तीन लोग मरे। 5 जुलाई को पटना के पुनपुन में एक कार ने तीन बाइकों को कुचला, जिसमें एक व्यक्ति और उसके दो बच्चों की मौत हुई। 4 जुलाई को किशनगंज में एक ट्रक ने बाइक सवार दंपति और उनके एक साल के बच्चे को कुचल दिया।


इन हादसों के पीछे दोषपूर्ण सड़क संरचना, चौराहों पर संकेतकों की कमी और पैदल यात्रियों की अनदेखी बड़े कारण हैं। सरकार ने iRAD और e-DAR पोर्टल के जरिए पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की है। अब तक 39,162 हादसे दर्ज किए गए और 18,000 मामलों को डिजिटल रूप से ट्रैक किया गया है लेकिन यह तकनीक जिंदगियां नहीं बचा पा रही हैं। 2023 में बिहार में 10,000 हादसों में करीब 8,900 मौतें हुईं थी और ये आंकड़े हर साल बढ़ ही रहे हैं।