BIHAR NEWS : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होने जा रही है। सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ एनडीए के नेता लगातार तेजस्वी यादव पर निशाना साध रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि विधानसभा सत्र से पहले वह आखिर बिहार से बाहर क्यों हैं। भाजपा और जदयू नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के नेता ऐसे समय में राज्य से बाहर हैं, जब विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने वाला है। इसे लेकर एनडीए नेताओं ने उनके राजनीतिक रवैये पर भी सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच भाजपा के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मानसून का मौसम आ चुका है और देश-दुनिया से लौटकर बादल भी बिहार की धरती पर पहुंच गए हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष अब तक राज्य में नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए तेजस्वी यादव को "परदेसी यादव" बताया और कहा कि विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन विपक्ष के नेता अभी भी गायब हैं।
नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की प्राथमिकता बिहार की जनता और राज्य की राजनीति नहीं है। उनके अनुसार, नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा में जनता के मुद्दे उठाने चाहिए, लेकिन वह राज्य से बाहर रहकर अपनी जिम्मेदारियों से दूरी बनाए हुए हैं। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव का पूरा ध्यान राजनीतिक संघर्ष से ज्यादा दूसरे कामों में दिखाई देता है।
नीरज कुमार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि - मानसून आ गया है पूरी दुनिया से घूम कर बदल भी बिहार की धरती पर मंडराने लगे हैं। कल से बिहार विधानसभा का मानसून सत्र भी शुरू हो रहा है *परदेसी यादव* अभी तक मिसिंग लीडर ही हैं। तेजस्वी यादव की दिलचस्पी बिहार की राजनीति में नहीं है उनकी पार्टी में नहीं है,उनकी दिलचस्पी कहीं और है सिर्फ पैसे बटोरने में रहते हैं।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि बिहार की जनता विपक्ष से अपेक्षा करती है कि वह विधानसभा में सरकार को जनहित के मुद्दों पर घेरने का काम करे, लेकिन यदि नेता प्रतिपक्ष ही सत्र के दौरान अनुपस्थित रहें या देर से पहुंचें तो इससे विपक्ष की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इससे पहले जदयू नेताओं ने भी तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा को लेकर तंज कसा था। जदयू की ओर से व्यंग्य करते हुए कहा गया था कि वह विदेश में इतने व्यस्त हैं मानो अंतरराष्ट्रीय मामलों में मध्यस्थता कर रहे हों। हालांकि यह बयान पूरी तरह राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर दिया गया था।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा का मानसून सत्र कई अहम मुद्दों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान सरकार कई विधेयक पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और अन्य जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बनी हुई है।
एनडीए का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है और नेता प्रतिपक्ष को विधानसभा में उपस्थित रहकर जनता की आवाज उठानी चाहिए। वहीं, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्र शुरू होने के बाद ही यह साफ होगा कि तेजस्वी यादव कब बिहार लौटते हैं और सदन की कार्यवाही में उनकी क्या भूमिका रहती है।
फिलहाल विधानसभा सत्र से पहले तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी बिहार की सियासत का नया मुद्दा बन गई है। भाजपा और जदयू लगातार इस मुद्दे को लेकर हमलावर हैं, जबकि अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नेता प्रतिपक्ष मानसून सत्र के दौरान कब सदन में पहुंचते हैं और सरकार के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।





