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बिहार में 1 जनवरी से ONLINE मिलेगा जमीन का नकल, हाईटेक हुआ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग

01 जनवरी 2026 से बिहार में राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति केवल डिजिटल हस्ताक्षरित रूप में उपलब्ध होगी। इस पहल से आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुविधाजनक होगी।

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अब नहीं लगाना पड़ेगा कार्यालय का चक्कर
© social media
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। दिनांक 01 जनवरी 2026 से राज्य में राजस्व अभिलेखों की सत्यापित (नकल) प्रति प्राप्त करने की पारंपरिक भौतिक प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर अब केवल भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियाँ ही निर्गत की जाएँगी, जिन्हें विधिक रूप से सत्यापित प्रतिलिपि के रूप में मान्यता प्राप्त होगी। इस संबंध में विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्त्ताओं, जिला अभिलेखागारों के प्रभारी पदाधिकारियों एवं अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


बिहार के उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का यह निर्णय आम नागरिकों की सुविधा, कार्य में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अब लोगों को सत्यापित नकल के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियाँ पूरी तरह वैधानिक हैं और कहीं भी मान्य होंगी। ये लोगों को आसानी से घर बैठे उपलब्ध होंगी। हमारा लक्ष्य है कि राजस्व सेवाएँ सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त हों। डिजिटल बिहार की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम है। आम नागरिकों को इसके लिए अब कहीं भागदौड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


अब तक राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। चिरकुट आवेदन, स्टाम्प शुल्क, पंजी में प्रविष्टि, आदेश प्राप्ति और अंततः नकल निर्गत होने तक 7 से 14 दिनों का समय लग जाता था। यह प्रक्रिया विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूर-दराज क्षेत्रों के नागरिकों के लिए श्रमसाध्य, खर्चीली और कष्टकारी थी।


विभाग ने स्पष्ट किया है कि भू-अभिलेख पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियाँ पूरी तरह वैधानिक हैं। यह व्यवस्था राजस्व परिषद, बिहार की अधिसूचना (26 जून 2024) के अनुरूप है, जिसके तहत ऑनलाइन निर्गत एवं डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों को प्रमाणित प्रतिलिपि माना गया है। इसके अतिरिक्त यदि कोई राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है, तो नागरिक उसकी ऑनलाइन माँग दर्ज कर सकते हैं, जिसे सत्यापन के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति के रूप में पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस निर्णय से न केवल समय, श्रम और धन की बचत होगी, बल्कि पारदर्शिता बढ़ेगी और कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ भी कम होगी। आम नागरिकों के हित में विभाग द्वारा व्यवस्था सुधार हेतु माननीय उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

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