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Bihar Crime: 12 साल बाद फिर खुली अनंत सिंह के करीबी की फाइल! कारोबारी का AK-47 से कत्ल, गंगा में फेंकी थीं लाशें... अब भोला सिंह उगलेगा कौन-कौन से राज?

12 साल पहले बिहार और पश्चिम बंगाल को दहला देने वाले डबल मर्डर केस की फाइल फिर खुल गई है। कारोबारी सुखदेव दास और विश्वजीत मंडल हत्याकांड के आरोपी भोला सिंह से अब पटना पुलिस रिमांड पर पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियों को कई बड़े खुलासों की उम्मीद है।

Bihar Crime: 12 साल बाद फिर खुली अनंत सिंह के करीबी की फाइल! कारोबारी का AK-47 से कत्ल, गंगा में फेंकी थीं लाशें... अब भोला सिंह उगलेगा कौन-कौन से राज?
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: क्या 12 साल पुराने उस डबल मर्डर की परतें अब पूरी तरह खुलने वाली हैं? क्या बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले उस खूनी नेटवर्क के चेहरे अब कानून के सामने बेनकाब होंगे? और क्या पुलिस की रिमांड में बैठा कुख्यात भोला सिंह उन रहस्यों से पर्दा उठाएगा, जो वर्षों से केस डायरी की धूल में दबे पड़े हैं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए पटना पुलिस अब उस अपराधी से आमने-सामने पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिसने कभी फिरौती, हथियार और दहशत के दम पर अपना साम्राज्य खड़ा किया था।


करीब 12 साल पहले हुए इस सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे बिहार और पश्चिम बंगाल को हिलाकर रख दिया था। कोलकाता के कारोबारी सुखदेव दास और उनके सहयोगी विश्वजीत मंडल अचानक लापता हो गए थे। शुरुआत में मामला अपहरण का लगा, लेकिन कुछ ही दिनों में यह कहानी फिरौती, विश्वासघात और बेहद निर्मम हत्या तक पहुंच गई। अब जब इस मामले का मुख्य आरोपी भोला सिंह पुलिस की गिरफ्त में है, तो जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि कई ऐसे राज सामने आएंगे, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

सिर्फ एक केस नहीं, नौ थानों के अपराधों का हिसाब

पटना पुलिस के मुताबिक भोला सिंह से सिर्फ डबल मर्डर केस में ही पूछताछ नहीं होगी। पंडारक, बाढ़, एसकेपुरी, गांधी मैदान, एनटीपीसी, लखीसराय समेत नौ अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। पुलिस का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई पुराने मामलों की गुत्थियां भी सुलझ सकती हैं। जांच एजेंसियों की नजर उन लोगों पर भी है, जिन्होंने वर्षों तक भोला सिंह और उसके गिरोह को पनाह दी या उनके लिए काम किया। यही वजह है कि रिमांड को इस पूरे अपराध नेटवर्क की 'मास्टर चाबी' माना जा रहा है।

कैसे रची गई थी दो कारोबारियों की मौत की साजिश?

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत जुलाई 2014 में हुई थी। कोलकाता के कारोबारी सुखदेव दास को व्यापारिक सौदे का झांसा देकर बुलाया गया। उनके साथ कारोबारी विश्वजीत मंडल भी थे। पहले दोनों को झारखंड के जसीडीह स्थित एक होटल में रखा गया। इसके बाद बोकारो में लोहे की छड़ खरीदने के नाम पर उन्हें बिहार के पंडारक लाया गया।

यहीं से कहानी ने खूनी मोड़ ले लिया। आरोप है कि अपहरणकर्ताओं ने 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी। रकम नहीं मिलने पर सुखदेव दास की AK-47 से गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद विश्वजीत मंडल को भी गंगा किनारे ले जाकर मौत के घाट उतार दिया गया। सबूत मिटाने के लिए दोनों शवों को बोरे में बंद कर गंगा में फेंक दिया गया, ताकि किसी को वारदात की भनक तक न लगे। लेकिन अपराधियों की यह चाल ज्यादा दिन नहीं चली।

कोलकाता से CBI तक पहुंची जांच

शुरुआत में मामले की जांच कोलकाता पुलिस ने की। जैसे-जैसे सुराग सामने आए, पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। आखिरकार 2015 में कोलकाता हाईकोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया।  सीबीआई की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में बताया कि इस पूरी साजिश में भोला सिंह के अलावा पटना के एसके नगर निवासी विकास सिंह, पंडारक के विपुल सौरव भारती उर्फ आजाद कुमार समेत कई अन्य लोगों की भूमिका सामने आई। लंबे समय तक चली जांच के बाद अब मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो चुकी है।

CRPF की वर्दी से गैंगस्टर बनने तक का सफर

भोला सिंह की कहानी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं मानी जाती। कभी वह सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल था। निशानेबाजी में उसकी अच्छी पकड़ थी, लेकिन समय के साथ उसने कानून की रक्षा करने के बजाय अपराध की दुनिया का रास्ता चुन लिया। धीरे-धीरे उसका नाम हत्या, रंगदारी और अपहरण जैसे संगीन अपराधों में सामने आने लगा। वह बाहुबली नेटवर्क से भी जुड़ा रहा। बाद में गैंगवार और ठेकेदारी के विवाद के चलते उसने अपना अलग गिरोह बना लिया। देखते ही देखते उसका नाम बिहार के कुख्यात अपराधियों की सूची में शामिल हो गया।

फर्जी पहचान बनाकर सालों तक फरार रहा

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए भोला सिंह और उसका साथी विकास सिंह वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल चले गए थे। वहां दोनों ने अपनी असली पहचान छिपा ली। भोला ने खुद को 'गौतम कुमार' और विकास ने 'महेश राम' बताकर किराये पर फ्लैट लिया। फर्जी दस्तावेजों के सहारे दोनों महीनों तक पुलिस की नजरों से दूर रहे और वहीं से अपने अपराधों का नेटवर्क चलाते रहे। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी दौरान डबल मर्डर की पूरी साजिश को अंतिम रूप दिया गया था।

अब रिमांड में खुलेंगे कितने राज?

सूरत से गिरफ्तारी के बाद अब भोला सिंह पटना पुलिस की रिमांड पर है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान न सिर्फ इस डबल मर्डर केस के कई अनसुलझे सवालों के जवाब मिलेंगे, बल्कि हथियारों की सप्लाई, रंगदारी के नेटवर्क, फरारी के दौरान मदद करने वालों और पुराने हत्या मामलों से जुड़े नए सुराग भी सामने आ सकते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 12 साल बाद इस खूनी फाइल का हर पन्ना खुल जाएगा? क्या पुलिस उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे नेटवर्क को चलाते रहे? आने वाले दिनों में भोला सिंह की रिमांड से निकलने वाली हर जानकारी इस हाई-प्रोफाइल केस की दिशा बदल सकती है और कई पुराने राज हमेशा के लिए बेनकाब हो सकते हैं।