बेगूसराय: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेगूसराय की धरती से एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जिले में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के नाम पर नई यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं होगा, बल्कि दिनकर जी के राष्ट्रवाद, संस्कृति और साहित्यिक विरासत को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह लगातार आग्रह करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे, तभी इस दिशा में निर्णय लेने का विचार किया गया था। अब सरकार इसे धरातल पर उतारने जा रही है।
दिनकर जी की विरासत को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने अपने साहित्य के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का जो संदेश दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी रचनाएं आज भी देशभर में पढ़ी जाती हैं और युवाओं को नई दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि बेगूसराय की पावन धरती पर बनने वाली यह यूनिवर्सिटी दिनकर जी के विचारों, साहित्य और भारतीय संस्कृति के अध्ययन का प्रमुख केंद्र बनेगी। यहां देश-विदेश के छात्र और शोधार्थी अध्ययन कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने किया बड़ा वादा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा,
"गिरिराज बाबू ने हमसे आग्रह किया है और जब मैं भाजपा का अध्यक्ष था, तब भी यह फैसला किया था कि बेगूसराय इलाके में एक यूनिवर्सिटी बने, ताकि दिनकर जी ने राष्ट्रीयता, संस्कृति और साहित्य का जो उदाहरण दिया, उसे पूरी दुनिया जान सके। मैं आज आश्वस्त करता हूं कि बेगूसराय की पावन धरती पर एक नया विश्वविद्यालय बनेगा और वह दिनकर जी के नाम से होगा।"
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
शिक्षा और शोध को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि नई यूनिवर्सिटी बनने से बेगूसराय सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके साथ ही शोध, साहित्य, भाषा, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़े नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिनकर जी के नाम पर विश्वविद्यालय बनने से हिंदी साहित्य, भारतीय दर्शन, संस्कृति और राष्ट्रवाद पर शोध को नई दिशा मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और शिक्षा का बेहतर माहौल तैयार होगा।
बेगूसराय को मिलेगी नई पहचान
बेगूसराय पहले से ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की जन्मभूमि के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। अब यदि यहां उनके नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना होती है तो जिले की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। इससे शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के इस ऐलान का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से जिले में एक बड़े विश्वविद्यालय की मांग उठ रही थी, जिसे अब सरकार ने पूरा करने का भरोसा दिया है।
सरकार जल्द शुरू करेगी आगे की प्रक्रिया
हालांकि मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के निर्माण की समयसीमा या स्थान को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस ऐलान को बेगूसराय के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो यह विश्वविद्यालय राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की अमर विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।





