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भरत तिवारी के एनकाउंटर पर भड़के अनिरुद्धाचार्य, कहा.."वोट लेने के बाद नेता जनता को मरवाना शुरू कर देते हैं"

भोजपुर के सामाजिक कार्यकर्ता भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शरण में आए व्यक्ति को मारना पाप है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बिहार न्यूज
'शरण में आए व्यक्ति को मारना पाप'
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

DESK: 6 दिन पहले बिहार के भोजपुर जिले में एक सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर अब सवालों के घेरे में हैं। पुलिस के रवैये पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग इसे फर्जी एनकाउंटर करार दे रहे हैं, और आरोपी पुलिस कर्मियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब तो कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने इसे लेकर सम्राट चौधरी की सरकार को घेरने का काम किया है। आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि शरण में आए हुए को कभी मारना नहीं चाहिए। यह रवैया सरकार का अच्छा नहीं है। जनता की हत्या करना राजा के लिए पाप है। ऐसे में जनता उन्हें पापी राजा कहेगी। गौ और ब्राह्मण की हत्या से सबको बचना चाहिए।


आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि सरकारे तो काम करती नहीं है, सरकारी काम करवाने के लिए भरत तिवारी ने अफसरों से कहा लेकिन अफसरो ने कुछ नहीं किया तब उसने बंदूक उठा ली। भरत ने बंदूक उठाई लेकिन किसी की हत्या के लिए नहीं उठाई, किसी का उसने मर्डर नहीं किया लेकिन पुलिस ने उसको मार डाला। भाई जब नहीं सुनेगो तो किसी को तो खड़ा होना ना पड़ेगा। जब भरत जनता की आवाज उठाने के लिए खड़ा हुआ तो उसे मार डाला गया। 


आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि यह रवैय्या सरकार का अच्छी नहीं है। जनता की हत्या करना राजा के लिए पाप है। ऐसे में जनता तुम्हे पापी राजा कहेगी, जो निर्दोष जनता को मार रहा है। शरण में आए हुए को कभी नहीं मारना चाहिए। यदि वो बहुत बड़ा अपराधी और आतंकवादी होता तो आप मारते कोई मनाही थोड़ी थी। आतंकवादी को आप मारिये। अपराधी है दस बीस मर्डर किये हुए है, उसको मार दिजिए कोई दिक्कत नहीं। एनकाउंटर कर दीजिए जो गलत है, लेकिन जो सही है जो अपने गांव समाज के लिए खड़ा हो रहा है, लड़ रहा है। 


आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आपका सिस्टम बहरा है, सिस्टम तो आप ठीक करोगे नहीं। जो खड़ा होगा उसी को मार डालोगे। यह सरकार का रवैय्या गलत है। कितनो को मारोगे फिर दूसरा खड़ा होगा। इसलिए ये बात नेताओं को समझनी चाहिए कि अपनी जनता को प्यार करे। वोट लेने के बाद देखो नेता लोग जनता को मरवाना शुरू कर देते हैं। तुम्हारी पुलिस कैसी है, इसलिए कहता हूं कि पुलिस को थोड़ा संस्कार देते, शिक्षा से तो आप ले लिये। राम चरित मानस का यह पाठ पढ़ाते कि शरण में आए हुए को मारना पाप है। 


बता दें कि भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के जवइनियां गांव सहित आसपास के कई गांव गंगा में आई बाढ़ के बाद कटाव से प्रभावित थे। पिछले साल जवइनियां गांव के 600 से ज्यादा घर गंगा में समा गए थे। लोगों का जीना दुश्वार हो गया तब एक फरिश्ता बनकर भरत तिवारी लोगों के सामने प्रकट हुआ। बाढ़ और कटाव पीड़ितों की आवाज बनकर भरत सामने आया। वह लगातार पीड़ितों की आवाज उठा रहा था। वह खुद अधिकारियों से मिलता था और गांव के लोगों की समस्या को उठाता था। विस्थापित हुए परिवारों को सरकारी मदद दिलाने के लिए लगातार कोशिश करता था। 


17 जून को शाहपुर थाने की पुलिस भरत की गिरफ्तारी के लिए पहुंची। उसके घर को पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया। छत पर चढ़कर भरत ने पुलिस कर्मियों को धमकाने लगा और फायरिंग की। थोड़ी देर बाद जब पुलिस कुछ दूर तक चली गई, तब भरत बाढ़ पीड़ितों से मिलने के लिए घर से जैसे निकला पुलिस भी वहां पहुंची और फिर एनकाउंटर के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गोली लगने से घायल भरत के पहले आरा अस्पताल ले जाया गया जहां से कुछ देर बाद PMCH ले जाया गया। जहां पीएमसीएच में भरत की मौत हो गयी। मौत के बाद परिजनों ने बताया कि भरत को पुलिस कर्मियों ने पास से पांच गोली मारी है। भरत के प्राइवेट पार्ट में भी गोली मारी गयी है। इस इनकाउंटर को लोगों ने फर्जी करार दिया और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या है। फिलहाल इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है।