Bihar MLC Election 2026 : जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद अब एक और अहम मोड़ पर पहुंच गया है। पटना स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई अब पार्टी के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुकी है। अनंत सिंह जहां पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं और अपने खुद के उम्मीदवार के समर्थन में उतर गए हैं, वहीं JDU ने दोनों नेताओं के बीच विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दी है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि मामला पार्टी के संज्ञान में है और ललन सिंह से बातचीत कर समाधान निकालने को कहा गया है। लेकिन अनंत सिंह और नीरज कुमार की कहानी सिर्फ 2026 के एमएलसी चुनाव तक सीमित नहीं है। इसकी जड़ करीब 11 साल पुरानी राजनीतिक टकराहट में है। आइए तारीखवार समझते हैं कि आखिर दोनों नेताओं के बीच विवाद कैसे यहां तक पहुंचा।
24 जून 2015: अनंत सिंह की गिरफ्तारी से बदला सियासी समीकरण
24 जून 2015 को पुटुस हत्याकांड के सिलसिले में तत्कालीन JDU विधायक अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया था। पटना पुलिस ने उनके आवास पर तलाशी अभियान चलाया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह घटनाक्रम बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ था। इसके बाद JDU ने 2015 के विधानसभा चुनाव में मोकामा से अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया। पार्टी ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया, जबकि अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
नवंबर 2015: मोकामा में अनंत बनाम नीरज सीधी लड़ाई
2015 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह और नीरज कुमार आमने-सामने थे। अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे और नीरज कुमार JDU के प्रत्याशी थे। चुनाव परिणाम में अनंत सिंह को 54,005 वोट मिले, जबकि नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले। अनंत सिंह ने 18,348 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया। यहीं से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी और गहरी हो गई। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों ओर से तीखे बयान भी सामने आए थे।
2017 के बाद: अनंत की राजनीति का नया दौर
2015 के बाद अनंत सिंह जेल में रहे और नवंबर 2017 में जेल से बाहर आए। इसके बाद उनकी राजनीतिक नजदीकी RJD से बढ़ी। आगे चलकर उन्होंने 2019 में अपनी पत्नी नीलम देवी को मुंगेर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया। इस चुनाव में उनका मुकाबला JDU के ललन सिंह से था।
16 अगस्त 2019: लदमा में AK-47 बरामदगी का मामला
16 अगस्त 2019 को अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा स्थित घर पर पुलिस ने छापेमारी की। पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान AK-47, कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए। इसके बाद अनंत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। अनंत सिंह ने इस मामले को अपने खिलाफ साजिश बताया था। 23 अगस्त 2019 को उन्होंने दिल्ली की साकेत कोर्ट में सरेंडर किया। इस मामले में बाद में उन्हें सजा भी हुई, हालांकि बाद के वर्षों में न्यायिक प्रक्रिया में स्थिति बदली। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
2022: AK-47 मामले में सजा और विधायकी पर असर
2022 में विशेष अदालत ने AK-47 और विस्फोटक बरामदगी से जुड़े मामले में अनंत सिंह को 10 साल की सजा सुनाई। इस सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई।
2024-25: राजनीतिक वापसी
इसके बाद अनंत सिंह की राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया। 2024 में पटना हाईकोर्ट से AK-47 मामले में उन्हें राहत मिली और बाद में वे सक्रिय राजनीति में लौटे। 2025 में वे फिर JDU में आए और मोकामा से चुनाव जीतकर विधायक बने। लेकिन JDU में वापसी के बाद भी नीरज कुमार के साथ पुरानी तल्खी खत्म नहीं हुई।
सितंबर 2026: पटना स्नातक एमएलसी चुनाव ने फिर बढ़ाई दूरी
सितंबर 2026 में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर JDU ने नीरज कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया। इसी दौरान अनंत सिंह ने खुलकर नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अनंत सिंह का आरोप है कि नीरज कुमार ने विधानसभा चुनाव के दौरान उनका विरोध किया था और पुराने विवादों में उनकी भूमिका रही। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह नीरज कुमार को चुनाव में हराने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।
दूसरी ओर नीरज कुमार ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए अनंत सिंह के बयानों पर सवाल उठाए और कहा कि अगर उनके पास किसी मामले में सबूत हैं तो उन्हें अदालत में जाना चाहिए। 19 सितंबर को नीरज कुमार ने अनंत सिंह के बारे में बेहद तीखी टिप्पणी भी की।
24 सितंबर 2026: अनुज सिंह को जन सुराज का टिकट
विवाद के बीच जन सुराज ने 24 सितंबर को पटना स्नातक सीट से डॉ. अनुज सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया। अनुज सिंह को पहले से ही अनंत सिंह का समर्थन हासिल था। इस तरह चुनावी मुकाबले में नीरज कुमार के सामने अनुज सिंह के रूप में एक नया राजनीतिक समीकरण बन गया।
30 सितंबर 2026: 50 हजार रसगुल्ले की चर्चा
अनुज सिंह के नामांकन से पहले अनंत सिंह के आवास पर 50 हजार रसगुल्ले तैयार किए जाने की खबर सामने आई। यह तैयारी उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बनी।
1 अक्टूबर 2026: खुली जीप में अनंत, अनुज के समर्थन में रोड शो
1 अक्टूबर को अनंत सिंह ने जन सुराज प्रत्याशी अनुज सिंह के नामांकन में खुलकर हिस्सा लिया। उन्होंने पटना में रोड शो किया और अनुज सिंह के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन किया। इसके बाद दोनों नामांकन के लिए पहुंचे। अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ अपनी नाराजगी दोहराई और कहा कि वह अनुज सिंह के लिए प्रचार करेंगे। उनका कहना है कि यह पार्टी का चुनाव नहीं है।
1 अक्टूबर 2026: नीतीश के आवास पर बैठक
उधर, जिस समय अनंत सिंह अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो कर रहे थे, उसी दौरान JDU के शीर्ष नेताओं की बैठक भी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, नीतीश कुमार के आवास पर संजय झा और बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें मौजूदा विवाद पर चर्चा की गई।
2 अक्टूबर 2026: विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को
अब 2 अक्टूबर को विवाद में नया मोड़ आया है। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि मामला पार्टी के संज्ञान में है और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के कार्यक्षेत्र से जुड़ा है। पार्टी ने ललन सिंह से बात की है और उन्हें दोनों पक्षों से चर्चा कर समाधान निकालने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम कड़ी यही है कि अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार जारी रखते हैं या नहीं और ललन सिंह दोनों नेताओं के बीच चल रही करीब एक दशक पुरानी राजनीतिक तल्खी को किस तरह संभालते हैं। फिलहाल JDU ने नीरज कुमार को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बताया है और विवाद पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होना बाकी है।



