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BIHAR NEWS : अनंत सिंह बोले- MLC चुनाव में नीरज के लिए वोट नहीं मांगूंगा, अब श्रवण कुमार ने कहा- पार्टी देख रही है मामला; अब एक्शन की बारी?

बिहार में MLC चुनाव से पहले JDU में सियासी घमासान तेज हो गया है। अनंत सिंह ने संभावित उम्मीदवार नीरज कुमार को समर्थन नहीं देने का ऐलान किया है। अब श्रवण कुमार के बयान के बाद सवाल है- क्या JDU अनंत सिंह पर एक्शन लेगी?

BIHAR NEWS : अनंत सिंह बोले-  MLC चुनाव में नीरज के लिए वोट नहीं मांगूंगा, अब श्रवण कुमार ने कहा- पार्टी देख रही है मामला; अब एक्शन की बारी?
Tejpratap
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6 मिनट

पटना: बिहार की राजनीति में एमएलसी चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अंदर सियासी हलचल तेज होती दिख रही है। मोकामा से विधायक और जेडीयू नेता अनंत सिंह के एक बयान ने पार्टी के भीतर नई चर्चा छेड़ दी है। मामला जेडीयू के मौजूदा एमएलसी और संभावित उम्मीदवार नीरज कुमार को समर्थन देने से जुड़ा है। अनंत सिंह ने साफ संकेत दे दिया है कि वह नीरज कुमार के पक्ष में वोट नहीं मांगेंगे। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पार्टी अब अनंत सिंह के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी? अब इस मामले में मंत्री श्रवण कुमार का बयान भी सामने आया है।

श्रवण कुमार ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद के बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी श्रवण कुमार का बयान भी सामने आया है। अनंत सिंह के रुख को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर इशारा किया।श्रवण कुमार ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेता और सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं और इस मामले में वही विशेष तौर पर कुछ बता पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के अंदर कहीं कोई दिक्कत या समस्या नहीं है। सभी लोग आपस में प्रेम और भाईचारे के साथ पार्टी चला रहे हैं और एनडीए को भी साथ लेकर चल रहे हैं।हालांकि, श्रवण कुमार के बयान का सबसे अहम हिस्सा यह रहा कि उन्होंने संकेत दिया कि अनंत सिंह के बयान को पार्टी देख रही है।उन्होंने कहा कि इस मामले में पार्टी जो निर्णय लेगी, उसकी जानकारी जल्द ही सामने आ जाएगी।

नीरज कुमार को समर्थन नहीं देंगे अनंत सिंह

एमएलसी चुनाव की तैयारियों के बीच अनंत सिंह ने खुले तौर पर कहा है कि वह जेडीयू के संभावित उम्मीदवार नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने समर्थकों को भी नीरज कुमार के लिए वोट अपील नहीं करने की बात कही है।अनंत सिंह का कहना है कि वह किसी दूसरे प्रत्याशी का समर्थन करेंगे और अपने समर्थकों से भी उसी उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने की अपील करेंगे।

यही बात जेडीयू के लिए परेशानी का कारण बन गई है। क्योंकि अनंत सिंह खुद जेडीयू के विधायक हैं और ऐसे में पार्टी के संभावित उम्मीदवार के खिलाफ उनका खुला रुख पार्टी के अंदर अनुशासन और राजनीतिक रणनीति दोनों पर सवाल खड़े कर रहा है।

एक विधायक का खुला विरोध, पार्टी में क्यों बढ़ी टेंशन?

राजनीति में चुनाव के दौरान नेताओं के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी पार्टी का मौजूदा विधायक ही उसी पार्टी के संभावित उम्मीदवार के समर्थन से पीछे हटने का ऐलान कर दे, तो मामला जरूर गंभीर हो जाता है।यही वजह है कि जेडीयू के भीतर अब चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह है कि अनंत सिंह का यह रुख केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद है या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी संदेश छिपा है? दूसरा बड़ा सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व इस बयान को किस नजर से देखता है। क्या इसे महज व्यक्तिगत मतभेद मानकर छोड़ दिया जाएगा या फिर पार्टी अनुशासन के तहत कोई कार्रवाई की जाएगी?

क्या अनंत सिंह पर होगी कार्रवाई?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। अनंत सिंह का बयान अब सिर्फ नीरज कुमार को समर्थन देने या नहीं देने तक सीमित नहीं रह गया है। मामला पार्टी अनुशासन तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।अगर जेडीयू नेतृत्व यह मानता है कि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खुले तौर पर प्रचार करना अनुशासन के दायरे में आता है, तो अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई की चर्चा तेज हो सकती है।

हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से अनंत सिंह के खिलाफ किसी कार्रवाई का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। श्रवण कुमार ने भी स्पष्ट रूप से कोई कार्रवाई घोषित नहीं की, बल्कि यह कहा कि पार्टी पूरे मामले को देख रही है और जल्द फैसला सामने आ सकता है।

नीरज कुमार की उम्मीदवारी पर भी नजर

इस पूरे विवाद के बीच नीरज कुमार की संभावित उम्मीदवारी भी चर्चा में है। अगर अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ किसी दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में जाते हैं, तो चुनावी समीकरण पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर तब, जब स्थानीय स्तर पर नेताओं और उनके समर्थकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो। ऐसे में अनंत सिंह का रुख जेडीयू के लिए सिर्फ संगठनात्मक मामला नहीं, बल्कि चुनावी गणित का भी सवाल बन सकता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल सबकी नजर जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व पर है। अनंत सिंह ने अपना रुख सार्वजनिक कर दिया है, श्रवण कुमार ने पार्टी के फैसले की बात कह दी है और अब इंतजार इस बात का है कि जेडीयू नेतृत्व इस बगावती तेवर पर क्या कदम उठाता है।क्या पार्टी अनंत सिंह को समझाकर मामला शांत करेगी?क्या उन्हें पार्टी अनुशासन का नोटिस दिया जाएगा?या फिर मामला कार्रवाई तक पहुंचेगा? एमएलसी चुनाव से पहले अनंत सिंह के इस रुख ने जेडीयू की राजनीति में नया ट्विस्ट जरूर ला दिया है। अब देखना होगा कि पार्टी इस राजनीतिक चुनौती को कैसे संभालती है और क्या अनंत सिंह के खिलाफ कोई बड़ा फैसला सामने आता है।