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सहानुभूति वोट पाने के लिए छाती पीट रहे राहुल गांधी, बोली बीजेपी..कानून से ऊपर नहीं कांग्रेस

21-Mar-2024 07:52 PM

By First Bihar

PATNA: खाता सीज होने पर सहानुभूति वोट पाने के लिए राहुल गांधी छाती पीट रहे हैं। बीजेपी ने कहा कि कानून के ऊपर कांग्रेस नहीं है। चुनावी बांड से परिवारवादी दलों की परेशानी बढ़ी है। उनके लिए कालाधन पाना मुश्किल हो गया है। बांड के कारण भाजपा का नकद चंदा 81 फीसद से घटकर 17 फीसद पर आ गया है। पार्टी से ऊपर देशहित के लिए प्रतिबद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी बांड लाया। आगे चुनावी बांड योजना और बेहतर रूप लेगी। 


बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कांग्रेस के बैंक खातों पर आय कर कानून के तहत रोक लगी है और कानून का पालन कर पार्टी रोक हटवा भी सकती है, लेकिन राहुल गाँधी इसे मुद्दा बना कर पीड़ित कार्ड खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राहुल गाँधी देश के कानून से ऊपर होने की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, इसलिए कांग्रेस का खाता सीज होने को "लोकतंत्र सीज" होना बता कर छाती पीट रहे हैं। देश पर इमरजेंसी थोपने वाली कांग्रेस लोकतंत्र नहीं है।


सुशील मोदी ने आगे कहा कि कांग्रेस सहित सभी परिवारवादी दलों को नकद चंदा लेने में यह सुविधा थी कि ने वे कितना पार्टी फंड में दिखायें, कितना अपनी जेब में डालें। एनडीए सरकार ने चुनावी बांड योजना लाकर चंदा घोटाले पर रोक लगाने की कोशिश की इसलिए इसका विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी बांड से कांग्रेस को 1600 करोड़ और राजद को 72.50 करोड़ मिले, फिर भी यदि यह गलत है, हफ्ता-वसूली है, तो इन दलों ने इसे क्यों स्वीकार किया?


सुशीद मोदी ने कहा कि चुनावी बांड योजना लागू होने से पहले भाजपा को 81 प्रतिशत से अधिक चंदा नकद मिलता था, जबकि बांड योजना के कारण 2017 और 2018 में नकद चंदा घट कर 17फीसद पर आ गया। 2023में मात्र 3फीसद फंड नकद मिला और 97 फीसद चुनावी बांड के रूप में पार्टी के खाते में मिले।


उन्होंने कहा कि चुनावी बांड से भाजपा को नुकसान ही हुआ, लेकिन "पार्टी से ऊपर देश" की नीति के प्रति संकल्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव में कालेधन का उपयोग रोकने के लिए चुनावी बांड योजना लागू की। यह पारदर्शिता कुछ दलों को नंगा कर रही है, इसलिए विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट चुनावी बांड की निगरानी कर रहा है, तब यह योजना अग्निपरीक्षा से गुजरने के बाद और बेहतर रूप में लागू होगी। इस पर राजनीतिक बयानबाजी करने से कुछ हासिल नहीं होगा।