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चिराग के सामने नरम पड़े पारस, करने लगे पार्टी और परिवार को एक करने की मांग, कहा..भतीजा CM बनें तो खुशी होगी

रालोजपा प्रमुख पशुपति पारस ने भतीजे चिराग पासवान से मतभेद भुलाकर पार्टी और परिवार को एक करने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि चिराग अगर बिहार के मुख्यमंत्री बनते हैं तो मुझे खुशी होगी।

बिहार न्यूज
देर आए लेकिन दुरुस्त आए
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के सुप्रीमो पशुपति कुमार पारस अब अपने भतीजे और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के प्रति नरम रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। आपसी मतभेद भुलाकर पार्टी और परिवार को अब वो एक करने की बात कह रहे हैं। पशुपति यह भी कह रहे हैं कि यदि उनका भतीजा चिराग पासवान बिहार के मुख्यमंत्री बनते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी।


दरअसल 2 अप्रैल गुरुवार को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान पशुपति पारस ने कहा कि “देर से आए, लेकिन दुरुस्त आए। पशुपति पारस ने आगे कहा कि उनके समर्थक और पार्टी के लोग चाहते हैं कि पार्टी और परिवार एक हो जाए।पशुपति पारस के इस बयान से अब सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पारस ने अपनी पार्टी रालोजपा और चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विलय का संकेत दे दिया है। लेकिन दोनों पार्टियों का विलय होगा या नहीं यह चिराग पासवान के फैसले पर निर्भर करता है। 


गौरतलब है कि लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में बड़ी टूट हो गई थी। उनके बेटे चिराग पासवान और भाई पशुपति पारस के बीच नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा होने के बाद चाचा-भतीजे ने अपनी अलग-अलग पार्टी बना ली थी। उस वक्त  पार्टी के अधिकांश सांसद चिराग से अलग होकर चाचा पारस के साथ चले गए थे।


लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग की एनडीए में वापसी हुई। तब केंद्रीय मंत्री पद से पारस ने इस्तीफा दे दिया था। पारस की पार्टी को गठबंधन में तब्बजों दी गयी. एनडीए में पारस के गुट वाली पार्टी रालोजपा को साइडलाइन कर दिया गया। जिसके बाद लोकसभा चुनाव में चिराग के गुट वाली लोजपा (रामविलास) को 5 सीटें दी गईं, जबकि पारस की पार्टी रालोजपा खाली हाथ रही। जिसके बाद पारस ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। 


2025 का बिहार विधानसभा चुनाव पारस की पार्टी रालोजपा ने गठबंधन से अलग होकर लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब पारस भतीजे की पार्टी के साथ अपनी पार्टी को मर्ज करने की बात कर रहे हैं। लेकिन फैसला चिराग पासवान को लेना है, ऐसे में अब सबकी नजरें चिराग पासवान पर टिकी हुई है कि वो क्या फैसला लेते हैं? हालांकि पशुपति पारस मुख्यमंत्री की कुर्सी पर भतीजे चिराग पासवान को देखना चाहते हैं, उनका यह सपना पूरा होता है या नहीं यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल उनके इस बयान से बिहार की सियासत गरमाई हुई है।