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कौन होगा बिहार का नया सीएम? मीडिया के इस सवाल पर बोले आनंद मोहन, कहा..BJP में पर्ची से तय होता है नाम

मुजफ्फरपुर दौरे पर आनंद मोहन ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए ‘पर्ची राजनीति’ का आरोप लगाया। साथ ही नीतीश कुमार के दिल्ली जाने को लेकर सवाल उठाए जिसने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी।

बिहार न्यूज
नीतीश के दिल्ली जाने पर सवाल
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

MUZAFFARPUR: बिहार की राजनीति के कद्दावर नेता और जेडीयू (JDU) समर्थक आनंद मोहन ने मुजफ्फरपुर दौरे के दौरान एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सूबे के सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर सिंह हत्याकांड के सिलसिले में एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा से मिलने पहुंचे आनंद मोहन ने ना केवल अपराध पर अपनी चिंता व्यक्त की, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर एनडीए के भीतर चल रही खींचतान पर भी खुलकर अपनी बात रखी।


"बीजेपी में पर्ची से तय होते हैं नाम"

अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस सवाल के जवाब में आनंद मोहन ने सीधे तौर पर भाजपा की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "भाजपा में कब किसकी पर्ची निकल जाए, यह कोई नहीं जानता। वहां फैसले पर्चियों से होते हैं, यह बात जगजाहिर है।" उनके इस बयान को भाजपा और जेडीयू के बीच भविष्य के नेतृत्व को लेकर चल रही रस्साकशी के रूप में देखा जा रहा है।


नीतीश के जाने से बिहार दुखी: आनंद मोहन

आनंद मोहन ने नीतीश कुमार के दिल्ली जाने (केंद्रीय राजनीति में सक्रिय होने) के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि बिहार की जनता ने '25 से 30 फिर से नीतीश' के नारे पर एनडीए को समर्थन दिया था। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा, "आखिर ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि नीतीश कुमार को बीच में ही बिहार छोड़कर जाना पड़ रहा है? बिहार के विकास के लिए उन्होंने जो काम किया, उसे भुलाया नहीं जा सकता। उनके जाने का दुख आज पूरे बिहार को है।"


सुशासन और अपराध पर बड़ी बात: मुजफ्फरपुर में बढ़ते अपराध, विशेषकर प्रॉपर्टी डीलर प्रभाकर हत्याकांड पर आनंद मोहन ने एसएसपी से अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब बिहार में व्यवसायी, महिलाएं और बुजुर्ग खौफ के साये में जीते थे। लेकिन नीतीश कुमार के सुशासन में बिहार ने चौमुखी विकास देखा और अपराधियों में कानून का डर पैदा हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुशासन की इस विरासत को बचाए रखना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।


सियासी मायने

आनंद मोहन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों को लेकर बिसात बिछने लगी है। '25 से 30 फिर से नीतीश' के स्लोगन को याद दिलाकर उन्होंने साफ कर दिया है कि जेडीयू खेमा अभी भी नीतीश कुमार को ही बिहार के निर्विवाद नेता के रूप में देखता है। उनके बयानों ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक है या आने वाले दिनों में गठबंधन के समीकरण फिर से बदल सकते हैं। फिलहाल, आनंद मोहन के इन तीखे तेवरों ने मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक की राजनीति को गरमा दिया है। अब देखना यह है कि भाजपा उनके 'पर्ची वाले' तंज पर क्या प्रतिक्रिया देती है।