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16-Jul-2025 06:10 PM
By FIRST BIHAR
PATNA: 2024 की शुरूआत में जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से पाला बदल कर बीजेपी का दामन फिर से थाम लिया था को विधानसभा में बड़ा दिलचस्प ड्रामा हुआ था. नीतीश कुमार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना था लेकिन सदन में कुछ औऱ खेला हो गया. शक्ति परीक्षण से पहले विपक्षी पार्टियों के कई विधायक पाला बदल कर सत्ता पक्ष की बेंच पर बैठ गये थे.
12 फरवरी 2024 को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान जिन विधायकों ने पाला बदला था, उनमें सबसे चौंकाने वाला नाम प्रहलाद .यादव का था. लंबे अर्से से लालू यादव औऱ आरजेडी से जुड़े प्रहलाद यादव के पाला बदलने की कल्पना किसी ने नहीं की थी. लेकिन वे विपक्षी पार्टियों के बेंच से उठकर सत्ता पक्ष के साथ बैठ गये थे. लेकिन प्रहलाद यादव ने शायद अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल कर दी. अब वे न घर के रहे और ना ही घाट के.
जेडीयू ने कहा टिकट नदीं देंगे
प्रहलाद यादव लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा क्षेत्र से विधायक है. आज जेडीयू ने खुला ऐलान कर दिया कि वह किसी सूरत में सूर्यगढा से प्रहलाद यादव को टिकट नहीं देगी औऱ इस सीट पर अपने सामाजिक समीकरणों के हिसाब से उम्मीदवार खड़ा करेगी. जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मीडिया के सामने इसका औपचारिक ऐलान कर दिया.
ललन सिंह का खुला ऐलान
ललन सिंह ने आज लखीसराय के सूर्यगढ़ा में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सूर्यगढ़ा जेडीयू की सीट है. जेडीयू अपने हिसाब से उम्मीदवार तय करेगा. ललन सिंह ने कहा कि जेडीयू अपने सामाजिक समीकरण को देखते हुए फैसला लेता है औऱ पार्टी सही समय पर अपना फैसला लेगी.
लखीसराय के आतंक को टिकट नहीं देंगें
पत्रकारों ने जब ललन सिंह से प्रहलाद यादव को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा-एक बात तो तय है कि लखीसराय के आंतक को जेडीयू किसी हालत में टिकट नहीं देगा. ललन सिंह ने पत्रकारों को कहा कि हमको नहीं मालूम है कौन आरजेडी का विधायक टिकट का दावेदार है. हमने एक बार कह दिया कि ये जेडीयू की सीट है और जेडीयू अपना उम्मीदवार तय करेगी. इसके साथ ही ये भी तय है कि जो लखीसराय का आतंक है, वो आतंक हमारा उम्मीदवार नहीं होगा.
बुरी तरह फंसे प्रहलाद यादव
ललन सिंह फिलहाल जेडीयू के सबसे ताकतवर नेता माने जाते हैं. ये सर्वविदित है कि जेडीयू में कोई उनकी बात को काटने वाला नहीं है. दूसरी ओर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से भी निकटता जगजाहिर है. जाहिर है जब ललन सिंह ये कह रहे हैं कि प्रहलाद यादव को टिकट नहीं देंगे तो प्रहलाद यादव के लिए एनडीए के रास्ते बंद हो गये हैं. दूसरी ओर आरजेडी में उनके लिए कोई जगह नहीं बची है.
प्रहलाद यादव ने अपनी राजनीति की शुरूआत ही लालू यादव के साथ की थी. लालू यादव के दम पर ही वे खुद कई दफे विधायक बने. इसके साथ ही उनकी पत्नी भी जिला परिषद की अध्यक्ष बनीं. उनके पाला बदलने से पूरा लालू परिवार सकते में था. तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में दिये गये अपने भाषण में प्रहलाद यादव के पाला बदलने पर आश्चर्य जताया था. ऐसे में प्रहलाद यादव की आरजेडी में वापसी भी संभव नहीं है. जाहिर है कि कभी लखीसराय के किंग कहे जाने वाले प्रहलाद यादव की राजनीति खत्म होती दिख रही है.