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पार्टी और परिवार दोनों को बचाना चाहता था, चिराग बोले.. चाचा ने मुझसे बात तक नहीं की

16-Jun-2021 03:20 PM

PATNA : लोक जनशक्ति पार्टी में मौजूदा संकट के लिए एलजेपी अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति कुमार पारस को जिम्मेदार ठहराया है. चिराग पासवान ने बताया है कि वह कभी परिवार के अंदर चल रही चीजों को राजनीतिक तौर पर सामने नहीं लाना चाहते थे. लेकिन अपने पिता की मौत के बाद ऐसे कई मौके आए, जब चाचा पशुपति कुमार पारस ने परिवार से लेकर पार्टी तक को तोड़ने की कोशिश की.


चिराग पासवान ने कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी का अध्यक्ष होने के नाते उनकी यह जिम्मेदारी थी कि वह कभी न कभी कोई सख्त कदम उठाएं. चिराग पासवान ने कहा कि जिस वक्त में मालूम पड़ा कि पशुपति पारस ने संसदीय दल का नेता चुने जाने का दावा पेश करते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है. उन्होंने उनसे बातचीत करने की कोशिश की. उनकी मां रीना पासवान ने भी पारस अंकल से बात करने का प्रयास किया लेकिन पशुपति पारस ने उन लोगों से बातचीत नहीं की. 


चिराग पासवान ने कहा कि आखिरकार मजबूरी में राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने चाचा पशुपति पारस समेत पांच सांसदों को पार्टी से बाहर करने का फैसला किया और वह भी संवैधानिक तरीके से पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर फैसला लिया गया. पार्टी को मजबूत बनाने के लिए और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह फैसला किया गया.


चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग भी उनके अध्यक्ष होने पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि लोक जनशक्ति पार्टी का संविधान क्या कहता है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक और संविधान की समझ रखने वाले एके बाजपेई जैसे कानूनी जानकार ने तैयार किया. पार्टी के संविधान के अनुसा राष्ट्रीय कार्यकारिणी, राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर मुहर लगा दे. तब तक कोई दूसरा राष्ट्रीय अध्यक्ष होने दावा कैसे कर सकता है.


चिराग पासवान ने कहा कि मीडिया में कुछ जगह ख़बर चल रही है कि मुझे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाया जा चुका है. लोक जनशक्ति पार्टी का संविधान कहता है कि पार्टी अध्यक्ष का पद सिर्फ दो परिस्थितियों में खाली हो सकता है या तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का निधन हो या राष्ट्रीय अध्यक्ष इस्तीफा दें. दुख मुझे इस बात का है कि जब मैं बीमार था, उस समय मेरे पीठ पीछे जिस तरह से ये पूरा षड्यंत्र रचा गया. मैंने चुनाव के बाद अपने चाचा से संपर्क करने का, उनसे बात करने का निरंतर प्रयास किया.


बिहार चुनाव के दौरान, उससे पहले भी, उसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा और खास तौर पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) द्वारा हमारी पार्टी को तोड़ने का प्रयास निरंतर किया जा रहा था. मेरी पार्टी के पूरे समर्थन के साथ मैने चुनाव लड़ा. कुछ लोग संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं थे. मेरे चाचा ने खुद चुनाव प्रचार में कोई भूमिका नहीं निभाई. मेरी पार्टी के कई और सांसद अपने व्यक्तिगत चुनाव में व्यस्त थे.


चिराग पासवान ने कहा कि संसदीय बोर्ड ही संसदीय दल के नेता को लेकर फैसला करता है. जिस तरह से पशुपति पारस को संसदीय दल का नेता बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा गया, उसको भी हमने स्पीकर को पत्र लिखकर के जानकारी देते हुए अपनी बात रखी है. लोक जनशक्ति पार्टी का संविधान जो कहता है, उसके मुताबिक संसदीय दल के नेता का चयन नहीं किया गया है. चिराग पासवान ने कहा कि मैं रामविलास पासवान का बेटा हूं और शेर की तरह आगे भी लड़ाई लड़ता रहूंगा. ना मैंने विधानसभा चुनाव के समय नीतीश कुमार के सामने नतमस्तक होने का फैसला किया और ना ही आगे करूंगा.