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बिहार में विकास कार्यों में सुस्ती पर प्रधान सचिव ने अफसरों को हड़काया, कहा- काम में देरी करने वाले अव्वल दर्जे के चोर

Bihar News: बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने विकास कार्यों में सुस्ती और भ्रष्टाचार पर कड़ी चेतावनी दी। देरी करने वाले अफसरों को “अव्वल दर्जे के चोर” बताया, और लागत बढ़ने पर व्यक्तिगत वसूली की बात कही।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार में विकास कार्यों में सुस्ती और लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने अफसरों और इंजीनियरों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो अधिकारी तय समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं करते, वे ईमानदार नहीं बल्कि अव्वल दर्जे के चोर हैं।


बुडको की कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रोजेक्ट में अफसरों या इंजीनियरों की लापरवाही के कारण देरी होती है और लागत बढ़ती है, तो उस अतिरिक्त राशि की वसूली सीधे संबंधित अधिकारी की जेब से की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो फाइल 10 मिनट में निपटनी चाहिए, उस पर 10 दिन बैठना भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है।


विनय कुमार ने कहा कि काम में सुस्ती कोई महात्मा होने की निशानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे अक्सर रिश्वतखोरी या लापरवाही होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी परियोजना की समय सीमा 12 महीने है तो उसे 15 महीने क्यों लगते हैं। देरी का असर सीधे प्रोजेक्ट की लागत और गुणवत्ता पर पड़ता है, जिससे ठेकेदार मजबूरी में घटिया सामग्री का उपयोग करता है और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।


प्रधान सचिव ने तकनीकी खामियों पर भी नाराजगी जताई। लखीसराय के एक प्रोजेक्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि डीपीआर और बिड डॉक्यूमेंट बनाने और मंजूरी देने वालों ने सामान्य समझ का भी इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी इंजीनियर डीपीआर और बिड डॉक्यूमेंट का गहराई से अध्ययन करें, ताकि तकनीकी गलतियों से बचा जा सके।


उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल बहानेबाजी से काम नहीं चलेगा। प्रोजेक्ट में देरी के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बुडको के इंजीनियरों को निर्देश दिया गया कि वे साइट पर जाकर काम की गुणवत्ता और गति की निगरानी करें, न कि केवल फाइलों में काम पूरा दिखाएं।


प्रधान सचिव विनय कुमार ने कहा कि आने वाले 30-40 साल बुडको जैसे संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। बढ़ती आबादी और जमीन की कमी को देखते हुए अब अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर और टनल निर्माण पर काम करना होगा। बुडको के प्रबंध निदेशक अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए इन-हाउस लैब भी बनाई जाएगी।


पटना में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में राज्य के सभी 38 जिलों के अधिकारी अपनी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। प्रदर्शन के आधार पर जिलों की रैंकिंग की जाएगी और बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता