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02-Jan-2025 11:38 AM
By First Bihar
Bihar Politics : बिहार विधान परिषद की एक सीट पर उप चुनाव हो रहे हैं. निर्वाचन आयोग ने तारीख का ऐलान कर दिया है. राजद विधान पार्षद सुनील सिंह की सदस्यता जाने के बाद रिक्त हुए सीट पर उप चुनाव हो रहे हैं. रिक्त सीट विधायक कोटे से भरी जानी है. संख्या बल के हिसाब से एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है. बताया जाता है कि यह सीट जेडीयू के खाते में जायेगी. नीतीश कुमार ने हाल में ब्राह्मण-पिछड़ा-अल्पसंख्यक को विप-रास भेजा है, लेकिन अति पिछड़ा इससे वंचित है. लिहाजा, जनता दल यूनाइटेड इस बार अति पिछड़ा समाज के नेता को मैदान में उतार सकती है.
जेडीयू के खाते में जाएगी सीट
राजद एमएलसी सुनील सिंह की सदस्यता समाप्त होने के बाद हो रहे उपचुनाव को लेकर तैयारी शुरू है. जानकारी के अनुसार एनडीए में यह सीट जेडीयू के कोटे में जाएगी. इसे लेकर समहति बन गई है. इस साल विधानसभा के चुनाव होने हैं. ऐसे में जेडीयू नेतृत्व जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर काम करेगी. 2024 में नीतीश कुमार ने उंची जाति, मुस्लिम और पिछड़ा समाज को राज्यसभा और विधानपरिषद में भेजकर सम्मान दिया. हालांकि अति पिछड़ा समाज इससे वंचित रहा.
ब्राह्मण- मुसलमान और पिछड़ा को मिला प्रतिनिधित्व, अब अति पिछड़ा की बारी
लालू परिवार के खिलाफ बगावत करने पर 2024 में राजद एमएलसी रामबली चंद्रवंशी की विधान परिषद की सदस्यता चली गई. राजद के कंप्लेन के आधार पर विधान परिषद सभापति ने सदस्यता खत्म कर दी. रामबली चंद्रवंशी की सदस्यता खत्म होने के बाद खाली सीट सत्ताधारी गठबंधन में जेडीयू के खाते में गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस सीट से पिछड़ा समाज से आने वाले भगवान सिंह कुशवाहा को विधान परिषद भेजा. पिछले साल(2024) विधान परिषद के 6 वर्ष वाले हुए चुनाव में नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यक समाज से आने वाले खालिद अनवर को रिपीट किया. यानि विधान परिषद में दूसरी दफे भेजा.
जेडीयू से विधान परिषद भेजे गए उपेन्द्र कुशवाहा ने 2023 में इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे से खाली हुई सीट पर हुए उप चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ब्राह्मण समाज से आने वाले राजवर्धन आजाद को विप का उम्मीदवार बनाया. आजाद विधान परिषद पहुंच गए. इसके बाद जेडीयू ने पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय झा जो ब्राह्मण समाज से आते हैं, इन्हें 2024 में राज्यसभा भेजा. इस तरह से 2023 अक्टूबर से लेकर 2024 तक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यक समाज, पिछड़ा समाज और सवर्ण (ब्राह्मण) को विधानपरिषद और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिया. इस दौरान अति पिछड़ा समाज वंचित रह गया है. खबर है कि इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अति पिछड़ा समाज के सशक्त जाति से उम्मीदवार बना सकते हैं.
विपक्ष का अति पिछड़ा समाज पर नजर
चूंकि, बिहार में इस साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. अति पिछड़ी जातियों पर विपक्ष की जबरदस्त रूप से नजर है. राजद अति पिछड़ों को लामबंद करने की कोशिश में है. वर्तमान में राजद का वीआईपी से गठबंधन है. मुकेश सहनी अति पिछड़ा समाज से आते हैं. बिहार में इस वर्ग की संख्या अच्छी खासी है. इतना ही नहीं राजद का भाकपा-माले जिसका अति पिछड़ों-गरीबों में जबरदस्त प्रभाव है, राजद का माले से गठबंधन है. वहीं कांग्रेस का भी अपना प्रभाव है. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी जेडीयू फूंक-फूंक कर कदम रखेगी. जेडीयू अगर अति पिछड़ों पर फोकस नहीं करी, तो विधानसभा चुनाव में खेल बिगड़ सकता है. ऐसे में विधान परिषद की एक सीट पर हो रहे उप चुनाव में पार्टी अति पिछड़ा उम्मीदवार दे सकती है. पार्टी के अंदर इस पर जबरदस्त रूप से मंथन चल रहा है.
मालूम हो कि, भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा कोटे की विधान परिषद में रिक्त एक सीट पर मतदान को लेकर कार्यक्रम जारी कर दिया है। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार अगर जरूरत पड़ेगी तो मतदान 23 जनवरी को होगा। इससे पहले छह जनवरी को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। नामांकन करने की अंतिम तिथि 13 जनवरी निर्धारित की गई है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 14 जनवरी को होगी। नाम वापसी की तिथि 16 जनवरी है।अगर जरूरत पड़ी तो मतदान 23 जनवरी को सुबह नौ बजे से दोपहर चार बजे तक कराया जाएगा। मतगणना उसी दिन शाम पांच बजे से आरंभ हो जाएगी। गौरतलब हो कि विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह की सदस्यता 27 जुलाई, 2024 को समाप्त कर दी गई थी। अब नए नवनिर्वाचित सदस्य का कार्यकाल 28 जून- 2026 तक होगा।