‘कयामत तक बाबरी नहीं बनेगी, कानून तोड़ने वालों को जहन्नुम मिलेगा’, सीएम योगी का बड़ा बयान ‘कयामत तक बाबरी नहीं बनेगी, कानून तोड़ने वालों को जहन्नुम मिलेगा’, सीएम योगी का बड़ा बयान Ghooskhor Pandit controversy: “घूसखोर पंडत” मूवी का टाइटल बदलेगी नेटफ्लिक्स, विवाद के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में मेकर्स ने दी जानकारी Ghooskhor Pandit controversy: “घूसखोर पंडत” मूवी का टाइटल बदलेगी नेटफ्लिक्स, विवाद के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में मेकर्स ने दी जानकारी UTS on Mobile shutdown: इस दिन से बंद हो जाएगा जनरल टिकट वाला UTS एप, रेलवे ने यात्रियों को दिया यह सुझाव UTS on Mobile shutdown: इस दिन से बंद हो जाएगा जनरल टिकट वाला UTS एप, रेलवे ने यात्रियों को दिया यह सुझाव Career News: अगर आपका भी विदेश में पढ़ाई और नौकरी पाने का सपना है, तो लग सकती है ठोकर; जानिए क्या है इसके पीछे की वजह BPSC TRE-4 : इस महीने जारी होगा TRE-4 का नोटिफिकेशन, इस बार नए नियमों के साथ हो सकती है परीक्षा; इन लोगों को मिल सकता है बड़ा फायदा Bihar News: बिहार में बुलडोजर एक्शन को लेकर भारी बवाल, ग्रामीणों के बीच झड़प; पुलिस ने संभाला मोर्चा बिहार विधान परिषद में उठा मुखिया-सरपंच को हथियारों का लाइसेंस देने का मामला, गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने दिया जवाब
10-Feb-2026 01:51 PM
By FIRST BIHAR
Parliament Budget Session: कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। पार्टी की ओर से यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया है, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस ने नियम 94C के तहत यह प्रस्ताव पेश किया है।
यह प्रस्ताव लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने और कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ सदन में कथित रूप से अनुचित स्थिति उत्पन्न होने के आरोपों के आधार पर लाया गया है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को खुलकर बोलने की छूट मिल रही है।
भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के अब तक तीन उदाहरण रहे हैं। पहला मामला वर्ष 1954 का है, जब सोशलिस्ट सांसद विग्नेश्वर मिसिर ने स्पीकर जी.वी. मावलंकर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रस्ताव पेश किया था, जिसे बहस के बाद खारिज कर दिया गया।
दूसरा मामला 1966 में सामने आया, जब मधु लिमये ने स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव लाया, लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण यह स्वीकार नहीं किया गया। तीसरा उदाहरण 1987 का है, जब सोमनाथ चटर्जी ने स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने खारिज कर दिया।
बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 94 के अनुसार, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस और सदन में बहुमत से पारित होना आवश्यक है।