Rajyasabha Election: किंगमेकर ओवैसी ने नहीं खोले पत्ते, RJD उम्मीदवार पर खतरा Bihar Politics : ओवैसी की ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति, पांचवीं सीट पर बढ़ा सस्पेंस; दिल्ली में तैयार रणनीति से बढ़ सकती है तेजस्वी की टेंशन Bihar Politics: निशांत के लिए बदल दी नीति! 2009 उपचुनाव में JDU नेता, मंत्री और विधायक-सांसदों के लिए बने नियम की अचानक क्यों होने लगी चर्चा? जानिए नीतीश कुमार ने क्या कहा था Patna Metro : पटना मेट्रो को मिली बड़ी राहत, राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे टनल बनाने की मिली मंजूरी; इस दिन से शुरू होगा काम बिहार मौसम अपडेट: 34.3°C पहुंचा तापमान, 12 जिलों में बारिश की संभावना, अररिया और किशनगंज में येलो अलर्ट बिहार के बदलते-बदलते खुद बदल गये नीतीश कुमार, तेज प्रताप यादव का बड़ा बयान खुले में मीट बेचने वालों पर नगर निगम ने कसा शिकंजा, अब बिना लाइसेंस के नहीं खुलेंगी दुकानें पेशी के दौरान हाजीपुर कोर्ट से भागने की कोशिश, अपहरण के आरोपी को पुलिस ने दोबारा पकड़ा नीतीश को डिजिटल अरेस्ट किया गया: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा..अब चंद्रबाबू नायडू की बारी Bihar Crime News: सात सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा, 11 साल पुराने मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला
03-Jul-2025 03:53 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Election 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीति गर्मा गई है। पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस अभियान का पूर्ण बहिष्कार करने का एलान किया है।
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीएलओ या चुनाव कर्मी को अपने गांवों में प्रवेश की अनुमति न दें, और अगर कोई आ जाए तो चाय-पानी कराकर विदा कर दें, लेकिन कोई दस्तावेज या जानकारी न दें। पप्पू यादव ने मतदाता पुनरीक्षण कार्य को नौटंकी बताया है।
पप्पू यादव ने कहा कि यह अभियान गरीबों, युवाओं और पिछड़े वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि जनता सर्वोपरि है, चुनाव आयोग लोकतंत्र की सेवा के लिए है लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो जनता को महायुद्ध छेड़ना होगा।
पप्पू यादव का आरोप है कि गरीबों के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं होते हैं। पिछड़े, दलित, और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना दस्तावेजों के लाखों लोग वंचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना, तो उनके माता-पिता के कागजात कहां से आएंगे?
बता दें कि चुनाव आयोग 22 साल बाद बिहार में घर-घर जाकर वोटर सत्यापन करवा रहा है। जिन लोगों के नाम 2003 के बाद वोटर लिस्ट में जुड़े हैं, उन्हें पहचान प्रमाण देना होगा। यह प्रक्रिया आगामी अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि गरीबों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश हो रही है। RJD, कांग्रेस और वाम दलों ने भी मतदाता पुनरीक्षण की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं।