BIHAR: दो बाइक की सीधी टक्कर में वकील की मौत, घायल युवक DMCH रेफर मुंगेर में अवैध गिट्टी और बालू ढुलाई पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 5 गिरफ्तार, 47 लाख का जुर्माना NEET छात्रा हत्याकांड!: जहानाबाद में 25 KM लंबा मार्च, सरकार पर लीपापोती का आरोप BIHAR: रंगदारी मामले में निलंबित थानाध्यक्ष अमरज्योति ने किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल पटना में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: तीन कॉल सेंटरों पर रेड, 22 गिरफ्तार फ्लैट खरीदारों के हित पर जोर: रेरा बिहार कार्यक्रम में न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह का मार्गदर्शन बिहार में अवैध खनन पर सरकार सख्त: सारण में कई वाहन जब्त, 75.65 लाख का जुर्माना राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत: होली और दिवाली पर मिलेगा मुफ्त गैस सिलेंडर Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल Bihar News: जनगणना को लेकर नीतीश सरकार ने शुरू की तैयारी, समन्वय समिति की हुई बैठक; पूछे जाएंगे आपसे 33 सवाल
05-Dec-2019 01:32 PM
DELHI: आज के जमाने में जहां बुजुर्गों को बोझ समझा जाता है. बेटा-बेटी और परिवार के रहने के बावजूद उन्हें ओल्ड एज होम में रहने के लिए मजबूर किया जाता है. तो वहीं अब सरकार बुजुर्गों की सेवा के लिए नया कानून ला रही है. नये कानून के मुताबिक बुजुर्ग लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी सिर्फ बेटा-बेटी की ही नहीं बल्कि बहू और दामाद की भी होगी. यह जिम्मेदारी गोद लिए हुए या सौतेले बच्चों पर भी समान रूप से लागू होगी.
केंद्र की मोदी सरकार देश में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़़ा बिल संसद में लाने जा रही है. कैबिनेट ने मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन अमेंडमेट बिल 2019 को मंजूरी दे दी गई है और अब जल्द ही बिल संसद में पेश किया जाएगा. यह बिल वरिष्ठ नागरिकों को बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगा.
इस बिल में कहा गया है कि बुजुर्गों की देखभाल का जिम्मा सिर्फ उनको बच्चों पर नहीं होगा बल्कि बेटा-बेटी, नाती-नातिन और पोता-पोती भी देखभाल के लिए कानून तौर पर बाध्य होंगे. वरिष्ठ नागरिकों और परिजनों के कल्याण से जुड़े 2007 के बिल में भी यह संशोधन किया जा रहा है. इसके मुताबिक परिवार में बच्चे अब सिर्फ अपने माता-पिता ही नहीं बल्कि सास-ससुर की देखभाल के लिए भी जिम्मेदार होंगे, भले ही वह वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में नहीं आते हों. वहीं इस कानून का उल्लंघन करने वालों की जेल की सजा तीन महीने से बढ़ाकर छह महीने कर दी गयी है.